MP को मिला मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवॉर्ड, मंडला में शूट हुई ‘मांदल के बोल’ को भी पुरस्कार
भोपाल, 23 जुलाई। 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में मध्य प्रदेश और देश के जाने-माने फिल्मकार राजेंद्र जांगले को नान फीचर फिल्म कैटेगरी में बेस्ट एथनोग्राफिक फिल्म के तहत 'मांदल के बोल' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। यह फिल्म भारत की सबसे आदिम जनजातियों में से एक बैगा के जीवन और उनके ग्रामीण परिवेश को प्रदर्शित करती है। इसे मध्यप्रदेश के ट्राइबल म्यूजियम, भोपाल में प्रोड्यूस किया गया है। इस फिल्म के निर्माण से जुड़े सभी काम करने वाले एक्टर और सहायकों को गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बधाई दी है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आज 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में प्रदेश को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवॉर्ड (Most Film Friendly State Award) प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के लिए सभी प्रदेशवासियों और फिल्म उद्योग से जुड़ी प्रदेश की प्रतिभाओं को बधाई।

वहीं, बेस्ट एथनोग्राफिक फिल्म कैटेगरी का अवॉर्ड 'मांदल के बोल' को मिलने पर डायरेक्टर राजेंद्र जांगले ने दर्शकों का आभार जताया है। जांगले को अब तक 6 नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं। इस फिल्म के डायरेक्टर राजेंद्र जांगले बताते हैं- हमको सबकुछ ओरिजनल रखना था। मंडला और डिंडोरी के जंगलों में रहने वाली इस जनजाति में जब भी जन्म-मृत्यु या शादी की खबर मिलती तो हम 10 लोगों की टीम लेकर वहां पहुंच जाते थे।
2017 में भी प्रदेश को मिल चुका है अवॉर्ड्स
मध्य प्रदेश को 68वे नेशनल फिल्म अवॉर्ड में दूसरी बार मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार मिला है। इससे पहले 2017 में भी प्रदेश को यह अवॉर्ड मिल चुका है। मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड्स के लिए 13 राज्यों ने नॉमिनेशन किया था। ऐसे में इस अवॉर्ड के लिए प्रदेश को लेकर कड़ी टक्कर मिली। हालांकि आखिर में प्रदेश के खाते में ही यह अवॉर्ड आया।
इस वजह से मिला बेस्ट लोकेशंस का अवॉर्ड
मध्य प्रदेश को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार मिलने में सरकार का बहुत ही बड़ा योगदान है। इसकी बड़ी वजह सरकार से सब्सिडी और शूटिंग के लिए सिंगल विंडो परमिशन है। साथ ही इसकी एक बड़ी वजह भोपाल की बसावट और प्राकृतिक बनावट भी है। अधिकतर फिल्में भोपाल के आसपास ही शूट की जाती है।












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