MP News: सियासी हलचल, मोहन मंत्रिमंडल विस्तार से पहले निगम-मंडल की सूची तैयार, संगठन में बदलाव की आहट
MP CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं, जो सत्ता में बड़े परिवर्तन के संकेत दे रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने निवास पर एक लंबी बैठक बुलाई, जिसमें दोनों उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और संगठन के शीर्ष नेता शामिल हुए।
इस बैठक में निगम-मंडलों की नियुक्तियों की सूची को अंतिम रूप दिया गया, जो लंबे समय से लंबित थी। साथ ही, पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी और विवादों को सुलझाने की कोशिश की गई। क्या यह बैठकें कैबिनेट फेरबदल या संगठन में नए चेहरों की एंट्री का इशारा हैं? हमने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, जिसमें बैठक के विवरण, पृष्ठभूमि, प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका और राजनीतिक निहितार्थ शामिल हैं।

भाजपा में समन्वय की जरूरत: सत्ता और संगठन के बीच तनाव की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार दिसंबर 2023 से डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही है। यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही पार्टी के अंदर गुटबाजी के आरोप लगते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के बीच तालमेल की कमी की खबरें लगातार आती रही हैं। हाल के महीनों में यह तनाव और बढ़ गया, जब कैबिनेट बैठक में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा था, "ग्वालियर नरक हो गया है, बर्बाद हो गया। सड़कें नहीं हैं, पानी की समस्या है, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह खत्म हो गया है।" इस बयान का समर्थन सिंधिया के एक अन्य समर्थक और ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी राम सिलावट ने किया।
यह बयान पार्टी हाईकमान तक पहुंचा, जिसके बाद दिल्ली से हस्तक्षेप हुआ। मुख्यमंत्री यादव ने सिंधिया को ग्वालियर जाकर बैठकें करने को कहा, और सिंधिया ने ताबड़तोड़ दौरा किया। लेकिन विवाद यहीं नहीं थमा। प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयानों से भी गुटबाजी के संकेत मिले। पार्टी संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल ने दिल्ली में बैठकें कीं, जहां प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी शामिल हुए। इन बैठकों से लौटते ही भोपाल में समन्वय बैठकें शुरू हो गईं, जो सत्ता में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही हैं।
मुख्यमंत्री निवास पर बैठक: 2 घंटे की मैराथन चर्चा
19 सितंबर 2025 की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जो लगभग 2 घंटे चली। बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, वरिष्ठ मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (विधानसभा अध्यक्ष) और अन्य नेता शामिल थे। संगठन की ओर से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य एजेंडा निगम-मंडलों की नियुक्तियों की सूची को अंतिम रूप देना था। मध्य प्रदेश में 50 से अधिक निगम-मंडल हैं, जैसे मध्य प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, पर्यटन विकास निगम, वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन आदि। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां लंबे समय से लंबित थीं। सूत्रों के अनुसार, सूची में पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल जैसे नाम चर्चा में हैं। बैठक में इन नामों पर मुहर लगाई गई, और जल्द ही घोषणा की उम्मीद है। साथ ही, संगठन की कार्यकारिणी के गठन पर भी चर्चा हुई, जो दशहरा के बाद हो सकती है।
इससे पहले, 19 सितंबर की रात मुख्यमंत्री यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के निवास पर जाकर 1 घंटे की मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात में नेताओं के अलग-अलग बयानों पर चर्चा हुई, और पार्टी में एकता बनाए रखने के उपायों पर विचार किया गया। यादव ने खुद मोर्चा संभालते हुए कहा कि सभी को एकजुट रखने के लिए वे स्वयं प्रयास कर रहे हैं।
गुटबाजी और विवाद: सिंधिया गुट का असंतोष
बैठक की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब पार्टी के अंदरूनी कलह में छिपा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उनके समर्थकों को कैबिनेट में जगह मिली, लेकिन हाल के महीनों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर असंतोष बढ़ा। सिंधिया गुट के मंत्री तोमर और सिलावट के बयानों ने आग में घी डाला। पार्टी हाईकमान को लगा कि यदि यह विवाद नहीं सुलझा तो आगामी लोकसभा उपचुनावों या स्थानीय चुनावों में नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं के बीच भी मतभेद की खबरें आईं। विजयवर्गीय इंदौर क्षेत्र से मजबूत पकड़ रखते हैं, जबकि पटेल बुंदेलखंड में प्रभावशाली हैं। संगठन में हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति के बाद से ही दिल्ली से मॉनिटरिंग बढ़ी है। हाल ही में खंडेलवाल और हितानंद दिल्ली गए थे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात हुई। इन सबके बीच, निगम-मंडलों की नियुक्तियां असंतुष्ट नेताओं को साधने का माध्यम बन सकती हैं।
एकता का महत्व
मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार मजबूत बहुमत के साथ है, लेकिन गुटबाजी से चुनावी नुकसान का खतरा है। हाल की सर्वदलीय बैठक में OBC आरक्षण पर एकजुटता दिखाई गई, जो पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विवाद नहीं सुलझे तो 2028 के विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते












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