Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

kisan MP News: किसानों को 10 घंटे बिजली कटौती का आदेश रद्द, CM मोहन यादव का डांडिया नाच के साथ जोरदार स्वागत

मध्य प्रदेश के किसानों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान लौट आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की 10 घंटे से अधिक बिजली कटौती के विवादास्पद आदेश को निरस्त कर दिया, जिससे रबी फसल की सिंचाई पर संकट टल गया।

इस फैसले का स्वागत किसानों ने अनोखे अंदाज में किया - डांडिया नाच के साथ। बरखेड़ी सब-स्टेशन पर पहुंचे सैकड़ों किसानों ने नाच-गान के बीच मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में यह धन्यवाद सभा बनी, जहां किसानों ने कहा, "यह आदेश निरस्त न होता तो हमारी गेहूं की फसल सूख जाती।

MP cancels 10-hour power cut for farmers welcomes CM Mohan Yadav with dandiya dance

सीएम साहब ने हमारी पुकार सुनी।" यह घटना न केवल किसानों की खुशी को दर्शाती है, बल्कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीति को भी रेखांकित करती है। आइए, जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की पूरी दास्तां - आदेश की पृष्ठभूमि से लेकर डांडिया नाच के जश्न तक।

बिजली कटौती का संकट: 10 घंटे का आदेश जो किसानों की कमर तोड़ रहा था

मध्य प्रदेश में रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी है, और गेहूं की फसल को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन 25 अक्टूबर 2025 को विद्युत वितरण कंपनी के चीफ इंजीनियर जैन साहब ने एक आदेश जारी किया, जिसमें किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक बिजली कटौती की अनुमति दी गई। इसका मतलब था कि सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलाने वाले किसानों को बारी-बारी से बिजली मिलेगी, लेकिन कुल मिलाकर 10 घंटे से ज्यादा कटौती हो सकती है। यह आदेश ऊर्जा संकट और लोड शेडिंग का हवाला देकर जारी किया गया था, लेकिन किसानों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा था।

किसान संगठनों ने तुरंत विरोध जताया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभागों में सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। एक किसान ने बताया, "गेहूं की फसल नवंबर-दिसंबर में पानी के बिना सूख जाती। 10 घंटे कटौती से पंप 4-5 घंटे ही चल पाते, पानी की रिले नहीं हो पाती। हमारी मेहनत बर्बाद हो रही थी।" विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 25 लाख से अधिक ट्यूबवेल हैं, जो 70% सिंचाई पर निर्भर। आदेश से 5 लाख किसान प्रभावित हो रहे थे। किसान नेता अनिल यादव ने कहा, "यह आदेश किसान विरोधी था। बिजली कंपनी ने बिना सोचे जारी किया।"

विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने ट्वीट किया, "किसान पहले ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं, ऊपर से बिजली कटौती। भाजपा सरकार सो रही है।" किसान संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) ने धरना दिया और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

मुख्यमंत्री का त्वरित फैसला: आदेश निरस्त, किसानों की पुकार सुनी

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किसानों की चिंता को गंभीरता से लिया। 3 नवंबर 2025 को उन्होंने ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए कि 10 घंटे कटौती का आदेश तुरंत निरस्त हो। एक प्रेस रिलीज में कहा गया, "किसानों की फसल सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। बिजली कटौती न्यूनतम रखी जाएगी, और सिंचाई के लिए प्राथमिकता मिलेगी।" यह फैसला चीफ इंजीनियर जैन साहब के आदेश को पूरी तरह रद्द करता है। अब किसानों को 24x7 बिजली की गारंटी नहीं, लेकिन कटौती 6-8 घंटे तक सीमित रहेगी, और रोटेशनल शेडिंग से बचाव होगा।

सीएम यादव ने कहा, "मध्य प्रदेश किसान राज्य है। हमारी सरकार ने 2023 से ही किसानों के लिए 24 घंटे बिजली का वादा किया था। कटौती संकट से थी, लेकिन किसानों का नुकसान नहीं होने देंगे।" ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी कहा, "नए सोलर प्लांट्स से लोड मैनेजमेंट होगा। किसानों को राहत मिलेगी।" यह फैसला राज्य के 1.5 करोड़ किसानों के लिए बड़ी राहत है, खासकर मालवा-निमाड़ और बुंदेलखंड क्षेत्रों में।

बरखेड़ी सब-स्टेशन पर जश्न: डांडिया नाच के साथ धन्यवाद, किसानों की अनोखी अभिव्यक्ति

आदेश निरस्त होते ही भोपाल के बरखेड़ी क्षेत्र में किसानों ने खुशी का इजहार अनोखे तरीके से किया। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में सैकड़ों किसान बिजली ऑफिस और बरखेड़ी सब-स्टेशन पर पहुंचे। उन्होंने डांडिया नाच किया - गरबा स्टाइल में डंडियों की थाप पर नाचे, मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए नारे लगाए। "मोहन भाई जिंदाबाद, किसान हितैषी जिंदाबाद!" के स्वर गूंजे। किसानों ने बैनर लहराए, "सीएम साहब, आपने हमारी फसल बचाई। धन्यवाद!"

एमएस मेवाड़ा ने बताया, "किसान दुखी थे, लेकिन सीएम ने एक झटके में राहत दी। डांडिया नाच हमारी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है - खुशी का प्रतीक।" एक किसान ने कहा, "10 घंटे कटौती से रातें जागते काट रहे थे। अब गेहूं हरा रहेगा।" सब-स्टेशन पर धन्यवाद सभा हुई, जहां किसानों ने सीएम को पत्र लिखा।

किसानों की मुसीबतें: सिंचाई संकट से फसल बर्बादी का खतरा टला,

इस आदेश से किसानों को कितना नुकसान हो रहा था?

  • सिंचाई प्रभाव: गेहूं को नवंबर-फरवरी में 4-5 सिंचाई की जरूरत। 10 घंटे कटौती से पंप 2-3 घंटे चलते, पानी की कमी से 20-30% उपज घट सकती।
  • आर्थिक नुकसान: एक एकड़ गेहूं से 40-50 क्विंटल, 2,425 MSP पर 1 लाख की कमाई। नुकसान से 20,000-30,000 का घाटा।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा में 2 लाख ट्यूबवेल प्रभावित।

किसान नेता ने कहा, "जैन साहब का आदेश बिना सोचे था। सीएम ने सुना, निरस्त किया।" ऊर्जा विभाग ने अब नई गाइडलाइंस जारी की - कटौती 8 घंटे तक, किसानों को प्राथमिकता।

सरकार की प्रतिबद्धता: किसान हित में बिजली सुधार, सोलर और सब्सिडी

मुख्यमंत्री यादव ने किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। 2023 से 'किसान सम्मान निधि' में 6,000 रुपये सालाना, और बिजली सब्सिडी 300 यूनिट फ्री। ऊर्जा विभाग ने 10,000 मेगावाट सोलर क्षमता जोड़ी। लेकिन संकट बने हुए हैं - थर्मल प्लांट की कमी से लोड शेडिंग। विभाग ने कहा, "2026 तक 24x7 बिजली सुनिश्चित।" विपक्ष ने सराहना की, लेकिन मांग की, "पूर्ण छूट दें।"

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+