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MP News: दलित पिछड़ा समाज संगठन DPSS में बड़े संगठनात्मक बदलाव, सुनीता धावरे बनीं महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष

DPSS MP News: दलित पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव मंडल के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भोपाल जिले में DPSS के जिला अध्यक्ष दिलीप म्हस्के और युवा विंग के जिला अध्यक्ष जितेंद्र अहीरवार को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। जल्द ही भोपाल में नए जिला अध्यक्ष और युवा विंग अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।

Major organizational changes in DPSS Sunita Dhavare becomes state president of the women s wing

इसके साथ ही संगठन ने महिला विंग में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ समाज सेविका सुनीता धावरे को DPSS महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। सुनीता धावरे लंबे समय से दलित-महिला उत्थान और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। संगठन के राष्ट्रीय सचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी हुकुमचंद गहलोत ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियुक्ति संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

नए प्रभारियों की नियुक्ति

संगठन ने विभिन्न जिलों में प्रभारियों की भी नियुक्ति की है। इनमें शामिल हैं:

  • कमल कुशवाह - एक प्रमुख जिले का प्रभारी
  • अमित बंसोड़ - दूसरे जिले का प्रभारी
  • अमोल रावत मीणा - तीसरे जिले का प्रभारी

ये नियुक्तियां संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाने के लिए की गई हैं। DPSS के भोपाल कार्यालय प्रभारी संदीप मेघवाल द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि भोपाल शहर के सभी वार्डों में भी वार्ड अध्यक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे संगठन की पहुंच हर वार्ड तक होगी और दलित-पिछड़े समाज की आवाज मजबूती से उठाई जा सकेगी।

बदलाव का उद्देश्य और संगठन का संकल्प

दामोदर यादव मंडल ने संगठन के इन बदलावों को "संगठन को नई ऊर्जा और गति देने" का कदम बताया है। उन्होंने कहा कि DPSS अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि दलित-पिछड़े समाज की एकजुट आवाज बनने जा रहा है। संगठन का लक्ष्य है कि हर जिले, हर ब्लॉक और हर वार्ड में सक्रिय कार्यकर्ता हों, जो सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ये बदलाव इसलिए भी जरूरी थे क्योंकि संगठन अब प्रदेश स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना चाहता है। भोपाल जैसे बड़े शहर में वार्ड स्तर तक संगठन पहुंचना दलित-पिछड़े समाज के लिए एक नया अध्याय साबित होगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह संगठनात्मक बदलाव प्रदेश में दलित-पिछड़े राजनीति पर नजर रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। DPSS हाल के वर्षों में सक्रियता बढ़ा रहा है और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मुखर हो रहा है। सुनीता धावरे की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति से महिला नेतृत्व को मजबूती मिलेगी। संगठन के इन कदमों से अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल, संगठन की नई टीम जमीनी स्तर पर काम शुरू करने में जुटी है। भोपाल में नए जिला और युवा अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठन की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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