मध्य प्रदेश में सूखे से किसान सबसे ज्यादा आहत

madhya-pradesh
भोपाल। दिल्ली में जहां बारिश हो गई है तो मध्य प्रदेश के किसान अब भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों पर चिंता की लकीरे हैं कि आखिर कब उनके खेत को कुदरत का पानी मिलेगा। बताया जा रहा था कि दस जून तक मॉनसून आ जाएगा और बरसात की आस पूरी हो जाएगी। लेकिन देश के कई अन्य राज्यों की ही तरह मध्य प्रदेश भी सूखे का दंश झेल रहा है। किसानों की हालत यह है कि उनके कई खेत में अभी पूरी तरह बुवाई भी नहीं हो पाई है।

सूखा पड़ा तो घट जाएगा उत्पादन

इस बार वैसे भी चालीस फीसदी कम बारिश हुई है। और पांच फीसदी कम बारिश का अंदेशा देश के मौसम वैज्ञानिक पहले ही लगा चुके हैं। यदि ऐसा ही रहा तो किसानों की आंखे एक अदद बारिश की बाट जोहते जोहते पथरा जाएंगी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इतने विकट हालात बन जाने के बावजूद अभी तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जिससे सूखे से परेशान किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ सके।

मौसम वैज्ञानिक कहते हैं मध्य प्रदेश में ज्याद सूखा

प्रबात खबर में छपी खबर के मुताबिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डा. अनुपम कश्यपी ने आज बताया कि पूर्वी मध्यप्रदेश में सूखे की स्थिति संभवत देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले अधिक विकट होने वाली है। अब तक राजधानी भोपाल में ही सामान्य से 190 मिलीमीटर कम बारिश दर्ज हुई है। जून से शनिवार तक महज 84 मिमी बारिश रिकार्ड हुई है। जो पिछले दस सालों में सबसे कम बारिश है।

7200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था बीज

किसानों ने इस बार खरीफ फसल के लिए 7200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बीज खरीदा था। लेकिन कुदरत का खेल तो देखिए अभी तक खरीफ फसल की बुवाई पुरी नहीं हो सकी है। इसकी मुख्य वजह यही रही है कि मध्य प्रदेश में बारिश बेहद कम दर्ज की जा रही है। इससे किसानों को भारी नुकसान होने का अनुमान है।

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