MP News: जबलपुर लोकायुक्त का छापा, महिला क्लर्क प्रीति ठाकुर 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
Jabalpur Lokayukta: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों का असर दिख रहा है। जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने सोमवार को एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम देते हुए सहायक ग्रेड-2 प्रीति ठाकुर को ₹5000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
यह कार्रवाई कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, जबलपुर संभाग में हुई, जहां प्रीति ठाकुर ने परमलोक धाम आश्रम सेवा समिति के रजिस्ट्रेशन के एवज में रिश्वत की मांग की थी। इस कार्रवाई ने न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया है। आइए, इस घटना, इसके विवरण, और इसके व्यापक प्रभावों को विस्तार से जानते हैं।

घटना का विवरण: रिश्वत की मांग और ट्रैप कार्रवाई
- आवेदक: शिवप्रसाद कुशवाहा (65 वर्ष), पिता लटोरा कुशवाहा, निवासी ग्राम कौड़िया, तहसील स्लीमनाबाद, जिला कटनी।
- आरोपी: प्रीति ठाकुर (45 वर्ष), पति संजय कुमार ठाकुर, पद- सहायक ग्रेड-2, कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, जबलपुर संभाग।
- घटना दिनांक: 15 सितंबर 2025
- घटनास्थल: कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, जबलपुर संभाग।
- ट्रैप राशि: ₹5000
लोकायुक्त जबलपुर को आवेदक शिवप्रसाद कुशवाहा ने शिकायत दर्ज की थी कि उनकी संस्था, परमलोक धाम आश्रम सेवा समिति, के रजिस्ट्रेशन के लिए कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं में कार्यरत प्रीति ठाकुर (सहायक ग्रेड-2) ने ₹5000 की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने त्वरित कार्रवाई की और एक ट्रैप दल गठित किया।
15 सितंबर 2025 को, लोकायुक्त की टीम ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही प्रीति ठाकुर ने आवेदक से ₹5000 की रिश्वत ली, लोकायुक्त दल ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती नीतू त्रिपाठी के नेतृत्व में निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक बी.एस. नरवरिया, और लोकायुक्त जबलपुर की टीम शामिल थी।
आरोपी प्रीति ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)B, और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है, और लोकायुक्त ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया है।
लोकायुक्त की कार्रवाई: योगेश देशमुख के निर्देशों का प्रभाव
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए बार-बार जोर दिया है। उनकी अगुवाई में मध्य प्रदेश में लोकायुक्त इकाइयां सक्रिय रूप से भ्रष्टाचार के मामलों पर नकेल कस रही हैं। इस कार्रवाई से पहले भी जबलपुर लोकायुक्त ने कई बड़े ट्रैप ऑपरेशन किए हैं, जिनमें पटवारी, पुलिसकर्मी, और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल रहे हैं।
देशमुख के निर्देशों के तहत, लोकायुक्त ने न केवल शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की है, बल्कि जनता में विश्वास जगाने के लिए पारदर्शी और प्रभावी तंत्र भी विकसित किया है। इस मामले में, आवेदक शिवप्रसाद कुशवाहा की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई और रंगे हाथ गिरफ्तारी इसका जीवंत उदाहरण है।
रिश्वत की मांग का खुलासा
आवेदक शिवप्रसाद कुशवाहा ने बताया कि उनकी संस्था, परमलोक धाम आश्रम सेवा समिति, का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वे कार्यालय असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, जबलपुर गए थे। वहां सहायक ग्रेड-2 प्रीति ठाकुर ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए ₹5000 की रिश्वत मांगी। कुशवाहा ने इस मांग को अनुचित माना और लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज की।
लोकायुक्त ने शिकायत की सत्यता की जांच की और पाया कि प्रीति ठाकुर ने रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद, एक ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई गई। लोकायुक्त की टीम ने आवेदक को रिश्वत की राशि देने के लिए तैयार किया और कार्यालय में ही ट्रैप लगाया। जैसे ही प्रीति ठाकुर ने ₹5000 की राशि स्वीकार की, लोकायुक्त की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई में दक्षता और पारदर्शिता
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाला ट्रैप दल बेहद कुशल और प्रशिक्षित था। दल का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती नीतू त्रिपाठी ने किया, जिनके साथ निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक बी.एस. नरवरिया, और लोकायुक्त जबलपुर की अन्य टीम शामिल थी।
लोकायुक्त ने इस कार्रवाई में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन किया। ट्रैप राशि को जब्त कर लिया गया, और प्रीति ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। लोकायुक्त ने बताया कि जांच के दौरान अन्य संभावित सबूतों और गवाहों की तलाश की जा रही है, ताकि मामला और मजबूत हो।
भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक मुहिम
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख की अगुवाई में मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाइयां हो चुकी हैं। हाल के महीनों में, जबलपुर, रीवा, इंदौर, और शहडोल जैसे क्षेत्रों में लोकायुक्त ने पटवारी, पुलिसकर्मी, और अन्य सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है।
- जून 2025: जबलपुर में पटवारी प्रवीण पटेल को ₹6000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
- जुलाई 2025: शहडोल में तहसीलदार के बाबू को ₹3000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
- सितंबर 2025: जबलपुर में एक दैनिक वेतन भोगी और समिति प्रबंधक को ₹4000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
ये कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सुनियोजित और निरंतर अभियान चला रही है। योगेश देशमुख ने कहा, "हमारा लक्ष्य भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ना है। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।"












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