भोपाल में धर्म-धम्म सम्मेलन: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू बोलीं- धर्म की आधारशिला पर टिकी हुई है पूरी मानवता

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हो रहे सातवें अंतरराष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन में 15 देशों के साडे 300 से ज्यादा विद्वान और 5 देशों के संस्कृति मंत्री शामिल हो रहे हैं।

International Dharma-Dhamma conference in Bhopal: President Droupadi Murmu and Shivraj attend

राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा 7वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन-2023 का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि धर्म धम्म सम्मेलन, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश को सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुझे खुशी है कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए बौद्ध और भारतीय ज्ञान अध्ययन ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। सीएम शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश का संस्कृति विभाग, इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर इस आयोजन को कर रहा है। मैं राम माधव और इंडिया फाउंडेशन को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने भोपाल को इस सम्मेलन के लिए चुना।

बता दे 'नए युग में मानववाद' के सिद्धांत पर केंद्रित यह सम्मेलन 5 मार्च तक चलेगा। पहले दिन सम्मेलन में संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर और सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ नीरज गुप्ता भी शामिल हुए।

भारत के गांव-गांव में आज भी बच्चा धार्मिक आयोजन में करता है उद्घोष: CM

भारत के गांव-गांव में आज भी बच्चा धार्मिक आयोजन में करता है उद्घोष: CM

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि केवल विद्वानों की सभाओं में नहीं, बल्कि भारत के गांव-गांव में आज भी बच्चा-बच्चा हर धार्मिक आयोजन में उद्घोष करता है कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो, सब में एक ही चेतना है। सबमें एक ही भाव है, एक ही चेतना है। हमने पशुओं में, पक्षियों में, कीट पतंगों में उसी एक आत्मा को देखा। इसीलिए भारत में दशावतार माने गए हैं। हमने नदियों की भी पूजा की और उन्हें मां माना।

हमने पेड़ों की भी की है पूजा: CM

हमने पेड़ों की भी की है पूजा: CM

सीएम ने कहा कि हमने पेड़ों की भी पूजा की। वट का वृक्ष, पीपल का पेड़ इसमें भी वही चेतना है। धर्म और धम्म का पहला सिद्धांत है, सभी जीवों के साथ दया और सम्मान का व्यवहार करना। दूसरा सिद्धांत 'ज्ञान और बोध' जिसका अर्थ है चीजों की नश्वरता और अंतरसंबंधों को पहचानना। तीसरा, आंतरिक शांति, निर्विकार भाव विकसित करना है। शिवराज ने कहा कि धर्म-धम्म सम्मेलन में अलग-अलग बिंदुओं पर विद्वान गंभीर चिंतन और मनन करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि इस चिंतन से जो अमृत निकलेगा, वो दुनिया को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन कराने में सफल होगा। भगवान गौतम बुद्ध ने कहा है कि युद्ध नहीं शांति, घृणा नहीं प्रेम, संघर्ष नहीं समन्वय, शत्रुता नहीं मित्रता, ये ही वो मार्ग हैं जो भौतिकता की अग्नि में दग्ध मानवता को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन कराएगा। इसके लिए धर्म धम्म सम्मेलन बहुत उपयोगी होगा।

दुख को दूर करने का मार्ग दिखाना पूर्व के मानववाद की विशेषता: राष्ट्रपति

दुख को दूर करने का मार्ग दिखाना पूर्व के मानववाद की विशेषता: राष्ट्रपति

कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा कि महर्षि पतंजलि, गुरु नानक, भगवान बुद्ध ने दुख से निकलने के मार्ग सुझाए हैं। मानवता के दुख के कारण का बोध करना और इस दुख को दूर करने का मार्ग दिखाना पूर्व के मानववाद की विशेषताएं है। आज के युग में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन का आयोजन करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार, सांची यूनिवर्सिटी ऑफ बुद्धिस्ट इंडिक स्टडीज तथा इंडिया फाउंडेशन की मैं सराहना करती हूं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धर्म धम्म का गहरा प्रभाव: राष्ट्रपति मुर्मू

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धर्म धम्म का गहरा प्रभाव: राष्ट्रपति मुर्मू

महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि धर्म की आधारशिला पर पूरी मानवता टिकी हुई है। राग द्वेष से मुक्त होकर मैत्री, करुणा और अहिंसा की भावना से व्यक्ति और समाज का विकास करना, पूर्व के मानववाद का प्रमुख संदेश रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता मिलने के बाद हमने जो लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई उस पर धर्म धम्म का गहरा प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। हमारे राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न को सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है। राष्ट्रीय ध्वज में भी धर्म चक्र सुशोभित है।

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