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MP News: IAS संतोष वर्मा ने तोड़ा मौन, मांगी माफी, लेकिन पूरा सच भी रखा सामने, जानिए कैसे फैला विवाद

जिस बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है, उस पर आखिरकार खुद IAS संतोष वर्मा ने मुंह खोला है। अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा ने सोमवार देर रात एक विस्तृत बयान जारी कर सफाई दी

वर्मा ने कहा, "मेरा उद्देश्य कभी भी राजनीतिक हंगामा खड़ा करना नहीं था। अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। लेकिन मेरी बात को सिर्फ एक पंक्ति में काट-छांट कर पेश किया गया।"

IAS Santosh Verma apologized but also revealed the full truth about the Brahmin character

संतोष वर्मा ने क्या कहा पूरा?

  • "अजाक्स की राज्य स्तरीय बैठक में आरक्षण को धार्मिक आधार की बजाय आर्थिक आधार पर देने की चर्चा चल रही थी।
  • मैंने कहा था - अगर मैं आर्थिक रूप से सक्षम हूं और सामाजिक रूप से भी अब पिछड़ा नहीं माना जाता, तो मेरे बच्चों को समाज से 'रोटी-बेटी का व्यवहार' मिलना चाहिए।
  • मेरा मतलब था - जब तक जातिगत भेदभाव खत्म नहीं होता, जब तक मेरा बेटा किसी भी घर में रोटी खा सके और कोई भी घर अपनी बेटी मुझे दे सके, तब तक सामाजिक पिछड़ापन खत्म नहीं हुआ।
  • मैंने 'दान' शब्द का इस्तेमाल गलती से कर दिया, जो आज के समय में अपमानजनक लग सकता है। मैंने तुरंत सुधार भी किया था कि 'रोटी-बेटी का व्यवहार' ही मेरा मतलब है।
  • लेकिन वीडियो में सिर्फ एक पंक्ति काटकर वायरल कर दी गई।"

वर्मा ने माफी भी मांगी

"महिलाओं की गरिमा मेरे लिए सर्वोपरि है। अगर मेरे शब्दों से किसी बहन-बेटी को ठेस पहुंची तो मैं दिल से खेद प्रकट करता हूं। मेरी किसी समुदाय के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है। मैंने सिर्फ सामाजिक समानता की बात की थी।"

फिर भी सवर्ण समाज का गुस्सा शांत नहीं

संतोष वर्मा की सफाई के बावजूद सवर्ण संगठनों ने कहा - "माफी से बात खत्म नहीं होती। 'ब्राह्मण बेटी दान करे' जैसे शब्द सरासर अपमानजनक हैं। चाहे व्यंग्य हो या गलती, एक IAS अधिकारी से ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं।"

ब्राह्मण समाज और मंत्रालय सेवा अधिकारी संघ ने फिर से निलंबन और FIR की मांग दोहराई है। पुराने आरोपों (CBI जज के हस्ताक्षर जालसाजी, महिला उत्पीड़न) का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि वर्मा का इतिहास ही संदिग्ध है।

सरकार अब तक खामोश

मुख्य सचिव वीरा राणा और सामान्य प्रशासन विभाग मौन हैं। सूत्र बता रहे हैं कि मंगलवार तक कोई फैसला हो सकता है - या तो लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा या फिर जांच कमेटी बनेगी।

अजाक्स का स्टैंड

अजाक्स ने अलग बयान जारी कर कहा - "हमारे अध्यक्ष ने सामाजिक समानता की बात की थी। उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। संगठन उनके साथ है।"

आखिरी सवाल अभी भी वही है

क्या सिर्फ एक शब्द की गलती के लिए IAS अधिकारी को निलंबित करना चाहिए?
या फिर "बेटी दान" जैसे शब्द चाहे संदर्भ कोई भी हो, अस्वीकार्य हैं?

भोपाल की सियासी गलियारों में यह बहस अभी थमने वाली नहीं।
संतोष वर्मा ने माफी मांग ली, लेकिन सवर्ण समाज का गुस्सा और विपक्ष का शोर अभी भी बरकरार है।
अब सबकी नजर सरकार पर टिकी है - कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
इंतजार कीजिए... मध्य प्रदेश की यह आग अभी और भड़कने वाली है।

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