MP News: गांधी सागर बांध नवीनीकरण के लिए 464 करोड़ रुपये स्वीकृत, मंत्रि-परिषद ने लिए कई अहम निर्णय
MP News: मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद ने मंगलवार को अपनी बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें मंदसौर और नीमच जिलों में चंबल नदी पर स्थित गांधी सागर जल विद्युत गृह के नवीनीकरण के लिए 464 करोड़ रुपये की स्वीकृति शामिल है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त रूप से कार्यान्वित की जाएगी, जिसमें राजस्थान के राणा प्रताप सागर जल विद्युत गृह का भी नवीनीकरण शामिल है।
दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 1037 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार का योगदान 30% होगा। इसके अलावा, मंत्रि-परिषद ने सावन में महाकाल सवारी की व्यवस्था, किसानों के लिए खाद की उपलब्धता, जैव विविधता संरक्षण, मेले में टैक्स छूट, और आधुनिक डाटा सेंटर के निर्माण जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

गांधी सागर बांध नवीनीकरण: 464 करोड़ रुपये की स्वीकृति
मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों में चंबल नदी पर स्थित गांधी सागर बांध, देश के सबसे बड़े जलाशयों में से एक है। 1960 में स्थापित इस जल विद्युत गृह की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 7 मार्च 1954 को रखी थी। यह बांध 204 फीट ऊंचा और 514 फीट लंबा है, जिसका जलाशय इंदिरा सागर और हीराकुंड जलाशय के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा जलाशय है। यह बांध न केवल बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए आश्रय स्थल भी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बर्ड लाइफ एजेंसी ने प्रमाणित किया है।
मंत्रि-परिषद ने गांधी सागर जल विद्युत गृह और राजस्थान के राणा प्रताप सागर जल विद्युत गृह के संयुक्त नवीनीकरण के लिए 1037 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इसमें मध्य प्रदेश का हिस्सा 464 करोड़ रुपये होगा, जो कुल लागत का लगभग 30% है। बाकी लागत राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से वहन की जाएगी। इस नवीनीकरण का उद्देश्य बांध की सुरक्षा, परिचालन दक्षता, और बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। यह परियोजना बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) के तहत विश्व बैंक और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की वित्तीय सहायता से कार्यान्वित की जाएगी, जिसका लक्ष्य पुराने बांधों की सुरक्षा और रखरखाव को सुनिश्चित करना है।
मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "गांधी सागर बांध 60 वर्ष से अधिक पुराना है। इसके नवीनीकरण से बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी और मध्य प्रदेश व राजस्थान के दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बेहतर होगी।" इस परियोजना में संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे बांध स्वास्थ्य और पुनर्वास निगरानी अनुप्रयोग (DHARMA) का उपयोग किया जाएगा, जो बांधों के डेटा प्रबंधन और निगरानी के लिए एक वेब-आधारित उपकरण है।
मंत्रि-परिषद के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मंत्रि-परिषद की बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो मध्य प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरणीय विकास को गति देंगे। इनमें शामिल हैं:
1. सावन में महाकाल सवारी की व्यवस्था
सावन मास में उज्जैन में आयोजित होने वाली भगवान महाकाल की सवारी में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंत्रि-परिषद ने प्रशासन की बेहतर व्यवस्था की सराहना की और भविष्य में इसे देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक बनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए कि सावन 2026 के लिए और बेहतर व्यवस्थाएं की जाएं, जिसमें सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाए।
2. किसानों के लिए खाद की उपलब्धता
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों और प्रशासन को निर्देश दिए कि बोवनी के समय किसानों को खाद की कमी या कालाबाजारी का सामना न करना पड़े। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण उर्वरक की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मंत्रि-परिषद ने खाद वितरण में पारदर्शिता और निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर जोर दिया।
3. जैव विविधता संवर्धन और पर्यटन
मंत्रि-परिषद ने मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई कदमों की घोषणा की। टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी क्षेत्र को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया। इन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस पहल की जाएगी। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि मध्य प्रदेश की प्राकृतिक समृद्धि भी विश्व स्तर पर उजागर होगी।
4. मेलों में टैक्स छूट
उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव व्यापार मेला और ग्वालियर में राजमाता सिंधिया मेला में ऑटोमोबाइल्स पर 50% टैक्स छूट को मंजूरी दी गई। यह निर्णय स्थानीय व्यापारियों और उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करेगा, साथ ही इन मेलों की लोकप्रियता को बढ़ाएगा। मंत्रि-परिषद ने इन मेलों को और भव्य बनाने के लिए विशेष बजट आवंटन की भी घोषणा की।
5. विश्वसनीय डाटा सेंटर का निर्माण
मध्य प्रदेश में एक आधुनिक और विश्वसनीय डाटा सेंटर के निर्माण को मंजूरी दी गई। यह डाटा सेंटर देश के अग्रणी डाटा सेंटर्स में से एक होगा और डिजिटल इंडिया मिशन को गति देगा। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, जिससे आईटी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मंत्रि-परिषद ने इस परियोजना के लिए निजी-सरकारी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विचार करने का निर्देश दिया।
गांधी सागर बांध का महत्व
गांधी सागर बांध चंबल नदी पर बने चार प्रमुख बांधों में से एक है, जो मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों में स्थित है। इसका निर्माण 1960 में पूरा हुआ था और यह मध्य प्रदेश और राजस्थान को बिजली आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराता है। बांध का हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन 115 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखता है। इसका उत्प्लव मार्ग (स्पिलवे) प्रति सेकंड 21,238 क्यूबिक मीटर पानी का निर्वहन करने में सक्षम है। यह बांध पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल है।
हालांकि, 60 वर्ष से अधिक पुराना होने के कारण बांध की संरचना और मशीनरी में समय-समय पर नवीनीकरण की आवश्यकता है। मंत्रि-परिषद का यह निर्णय बांध की दीर्घकालिक स्थिरता और दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नवीनीकरण के तहत बांध की संरचनात्मक मजबूती, विद्युत उपकरणों का आधुनिकीकरण, और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
सामाजिक और सियासी प्रतिक्रिया
गांधी सागर बांध नवीनीकरण और मंत्रि-परिषद के अन्य निर्णयों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने एक एक्स पोस्ट में कहा, "गांधी सागर और राणा प्रताप सागर बांधों का नवीनीकरण मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए बिजली और सिंचाई के क्षेत्र में एक नया युग शुरू करेगा।"
स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् भी इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। मंदसौर के एक स्थानीय निवासी, रमेश शर्मा, ने कहा, "गांधी सागर बांध हमारी पहचान है। इसका नवीनीकरण न केवल बिजली उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहन देगा।" हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि नवीनीकरण के दौरान पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए मांग की है कि परियोजना को समय पर और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जाए। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने कहा, "गांधी सागर बांध का नवीनीकरण स्वागत योग्य है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसमें कोई भ्रष्टाचार न हो और स्थानीय लोगों को इसका अधिकतम लाभ मिले।"
बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) का संदर्भ
गांधी सागर बांध का नवीनीकरण बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) के दूसरे और तीसरे चरण का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 अक्टूबर 2020 को मंजूरी दी थी। इस परियोजना की कुल लागत 10,211 करोड़ रुपये है, जिसमें 19 राज्यों के 736 बांधों का पुनर्वास शामिल है। मध्य प्रदेश उन 10 राज्यों में शामिल है, जो इस परियोजना के तहत विश्व बैंक और AIIB से वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे हैं। DRIP का लक्ष्य बांधों की सुरक्षा, परिचालन दक्षता, और दीर्घकालिक प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।
DRIP के तहत मध्य प्रदेश में पहले चरण (2012-2021) में कई बांधों का पुनर्वास किया गया था, और अब दूसरे और तीसरे चरण में गांधी सागर जैसे महत्वपूर्ण बांधों को शामिल किया गया है। परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित DHARMA टूल का उपयोग भी किया जा रहा है, जो बांधों की निगरानी और डेटा प्रबंधन में मदद करता है।












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