MP News: साइबर ठगों ने मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर के बेटे को बनाया शिकार, 3.19 लाख की ठगी का खुलासा
Bhopal news: मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, और अब यह ठगी का सिलसिला आम लोगों के साथ-साथ नेताओं और उनके परिजनों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर के पोते आकाश गौर के साथ ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने उन्हें लेबर सप्लाई का ठेका दिलाने के नाम पर 3 लाख 19 हजार रुपए की ठगी कर डाली।

कैसे हुआ ठगी का मामला?
मंत्री कृष्णा गौर के बेटे आकाश गौर ने साइबर क्राइम पुलिस को शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें एक फर्जी ईमेल आईडी के जरिए एक व्यक्ति ने संपर्क किया था, जिसने उन्हें लेबर सप्लाई का ठेका दिलवाने का वादा किया था। ठग ने आकाश को यह भरोसा दिलाया कि वह ठेका दिलवाने के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया के लिए एक अग्रिम राशि की मांग करेगा। इस प्रकार, आकाश गौर को विश्वास में लेकर ठग ने कुल 3.19 लाख रुपये की ठगी की।
साइबर क्राइम की त्वरित कार्रवाई
भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस की जांच में सामने आया कि ठग ने फर्जी ईमेल आईडी बनाकर बैंक को मेल किया था, जिसमें उसने कहा था कि बैंक खाते को अनहोल्ड करने की प्रक्रिया की आवश्यकता है। इसके बाद बैंक ने पुलिस से जानकारी मांगी, और यह जालसाजी का मामला सामने आया।

साइबर क्राइम पुलिस ने आगे की जांच में पता लगाया कि आरोपी ने इस ठगी के लिए बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते का इस्तेमाल किया था। हालांकि, ठगी का पैसा बैंक के खाते में आने से पहले ही एक अन्य सहकारी बैंक के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।
आरोपी की गिरफ्तारी
साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए आरोपी की पहचान की और उसे गिरफ्तार किया। आरोपी का नाम सैफ अली चाऊस है, जिसे भोपाल से गिरफ्तार किया गया है। सैफ अली चाऊस ने साइबर क्राइम की फर्जी मेल आईडी बनाकर बैंक को मेल किया था, ताकि वह ठगी की रकम को अवैध तरीके से निकाल सके। पुलिस ने सैफ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
क्यूआर कोड से ठगी का तरीका
आकाश गौर ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि 20 मार्च 2024 को सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच एक व्यक्ति ने उन्हें फोन किया। फोन करने वाले ने खुद का नाम आरके यादव बताया और आकाश से पूछा कि क्या वे लेबर सप्लाई का काम करते हैं। आकाश ने इसका जवाब दिया कि वह ठेकेदारी करते हैं। इसके बाद फोन करने वाले ने कहा कि उन्हें एक टेंडर मिल जाएगा, लेकिन इसके लिए उन्हें क्यूआर कोड पर एंट्री करनी होगी और इसके बाद ही काम अलॉट होगा।
ठग ने वेंडर कोड जनरेट करने के लिए कहा
आकाश गौर को फोन करने वाले ने उन्हें विश्वास दिलाया कि टेंडर पाने के लिए वे एक वेंडर कोड जनरेट करें। इसके बाद ठग ने आकाश को तय शुल्क जमा करने को कहा और थोड़ी देर बाद ही एक क्यूआर कोड उनके वॉट्सऐप पर भेज दिया। ठग ने उन्हें निर्देश दिया कि वे इस क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान करें ताकि टेंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी हो सके।
आकाश गौर ने पूरी प्रक्रिया को सही समझते हुए ठग के कहे अनुसार 20 मार्च 2024 को विभिन्न बैंक खातों से 3 लाख 19 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, इसके बाद ठग ने उनका फोन बंद कर दिया और आकाश को यह एहसास हुआ कि वह एक जालसाजी का शिकार हो गए हैं।

सैफ अली ने साइबर क्राइम की नकली ईमेल बनाई
साइबर क्राइम पुलिस ने बताया कि आरोपी सैफ अली ने पहले एक बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने के बाद आरोपी राकेश यादव को कमीशन दे दिया था। जब पुलिस ने मामले की जांच की, तो पता चला कि सैफ अली ने साइबर क्राइम पुलिस की नकली ईमेल आईडी तैयार की थी। उसने [email protected] जैसे सरकारी डोमेन से मेल भेजने की बजाय [email protected] नामक एक फर्जी मेल आईडी बनाई। इसके बाद सैफ ने इस फर्जी मेल आईडी का इस्तेमाल कर बैंक से संपर्क किया और सहकारी बैंक के खाते को खोलने के लिए मेल भेजा।
बैंक ने शक होने पर साइबर क्राइम पुलिस को सूचित किया
बैंक को मेल आईडी पर शक होने पर उसने तुरंत साइबर क्राइम भोपाल को सूचित किया। बैंक का शक सही साबित हुआ, और पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि सैफ अली ने वेंडर कोड जनरेट करने के नाम पर ठगी की थी और धोखाधड़ी की रकम को मुंबई स्थित बैंक ऑफ इंडिया के खाते में ट्रांसफर कर दिया था। इस खाते को बाद में पुलिस ने बंद कर दिया।

3.5 लाख रुपये की ठगी की गई थी
यह ठगी एक फर्जी महिंद्रा कंपनी के लेबर कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर की गई थी। सैफ अली ने ठगी के बाद 3.5 लाख रुपये की राशि अपने खाते में ट्रांसफर की थी और फिर यह राशि राकेश यादव को दे दी थी। पुलिस ने इस मामले की गहरी जांच की और पाया कि सैफ ने क्राइम ब्रांच की नकली ईमेल आईडी बनाई थी ताकि बैंक को धोखा दिया जा सके।
साइबर क्राइम पुलिस की त्वरित कार्रवाई
आखिरकार, साइबर क्राइम भोपाल ने जांच के बाद आरोपी सैफ अली चाऊस को गिरफ्तार किया। एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यह ठगी महिंद्रा कंपनी के लेबर कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर की गई थी, और सैफ ने इस प्रक्रिया के दौरान एक फर्जी मेल आईडी का इस्तेमाल किया। इस ठगी की रकम को दूसरे आरोपी को ट्रांसफर किया गया था। पुलिस ने बताया कि ठगी की पूरी रकम को सैफ अली के खाते में ट्रांसफर किया गया था, जिसे अब फ्रीज कर दिया गया है।
साइबर ठगी के बढ़ते तरीके
यह घटना यह साबित करती है कि साइबर ठग अब सिर्फ बैंकिंग धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे सरकारी और प्राइवेट संस्थानों की मेल आईडी का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले में, ठग ने साइबर क्राइम की ईमेल आईडी से मेल भेजने का प्रयास किया और बैंक को धोखा देने की कोशिश की। यह साइबर ठगों के नए और संगठित तरीके को उजागर करता है।
साइबर ठगी से बचने के उपाय
यह मामला यह साबित करता है कि साइबर ठगों का नेटवर्क अब ज्यादा संगठित और प्रभावी हो गया है, जो न केवल आम जनता बल्कि राजनीतिक हस्तियों और उनके परिजनों को भी शिकार बना रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे धोखाधड़ी के मामलों से बचने के लिए सतर्क रहें और किसी भी तरह के अनजान प्रस्ताव या ईमेल से सतर्क रहें। उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय लेन-देन या निजी जानकारी साझा करने से पहले पूरी तरह से जांच कर लेनी चाहिए।












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