यहां खुले में शौच की तस्वीर लेने पर मिलता है 'ईनाम'

जी हां एकदम सही पढ़ रहे हैं आप। मध्य प्रदेश में खुले में शौच को खत्म करने के लिए प्रशासन द्वारा ये कदम उठाया जा रहा है। हालांकि डर इस बात का है कि कहीं खुले में शौच करने वाले भी कन्हैया की तर्ज पर उस नारे को न दुहराने लगें कि...''हमें चाहिए आजादी, खुले में शौच की आजादी।'' क्या हुआ हंसी आ गयी क्या। लेकिन जरा कल्पना कीजिए कि वक्त बदल गया, आधुनिकता से हम रूबरू हो गए, स्मार्टफोनधारी हो गए पर खुले में शौच करने की आदत से अभी भी एक बड़ी संख्या में लोग मजबूर हैं।

अब खुले में शौच करने की तस्वीर सोशल मीडिया पर होगी साझा

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बहरहाल मध्य प्रदेश में की जा रही इस पहल से कयास लगाया जा रहा है कि हो सकता है कि शर्म के कारण ही सही लोग अपनी इस गंदी आदत में सुधार करें। जबकि लोगों के सामने पश्चिम बंगाल का नदिया जिला उदाहरण के तौर पर मौजूद है। जहां लोग सजग हैं, स्वास्थ्य के प्रति सचेत हैं, उन्हें शर्मिंदगी लगती थी खुले में शौच जाने पर। तो सीखिए इनसे कुछ।

तय की गई हैं 20 ग्राम पंचायतें

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रशासन ने खुले में शौच करने वालों की तस्वीर व्हाट्स एप पर भेजने पर 100 रूपये देने का ऐलान किया है। प्रशासन 15 अगस्त तक खुले में शौच से मुक्त बनाने का अभियान चला रहा है। प्रशासन की यह ईनाम वाली घोषणा 20 ग्राम पंचायतों के लिए है।

खुले में शौच करते पाए गए तो होगा कैंसिल होगा ''राशन कार्ड''

आपको बताते चलें कि ढ़ीलाहवाली पर सख्ती बरतते हुए कुछ दिनों पूर्व ही प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने घोषणा की थी कि यदि कोई व्यक्ति खुले में शौच करता हुआ पकड़ा गया तो उसका राशन कार्ड कैंसल कर दिया जाएगा।

''खुले में शौच'' मुक्त इस जिले से सबक लें लोग

आश्चर्य सा लग रहा होगा न। बहरहाल ये हकीकत है। भारत का पहला जिला जहां करीबन हर व्यक्ति शौचालय का ही प्रयोग करता है। दरअसल हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की। इस जिले को बाकायदा यूनीसेफ और वर्ल्ड बैंक ने प्रमाणित किया है। अक्टूबर 2013 को शुरू हुई जिला प्रशासन की 'शोबार शौचागर' यानि की सबके लिए शौचालय मुहिम के तहत नदिया के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 3,55,000 शौचालय बनवाए गए। मार्च 2015 तक प्रशासन ने सभी के घरों में शौचालय बनवाने में कामयाबी हासिल की। 30 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नदिया को देश का पहला खुले में शौच मुक्त ज़िला घोषित किया।

''डरिए'' क्योंकि आप ''खतरे'' में हैं

यूनिसेफ़ और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, भारत की लगभग आधी आबादी खुले में शौच करती है। वहीं चिकित्सकों का मानना है "अगर पोलियो को जड़ से मिटाना है तो खुले में शौच की प्रथा को ख़त्म करना होगा।"

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