Chitrakoot: नानाजी की जयंती पर 4 दिवसीय Gramodaya Mela का हुआ आगाज, पहले दिन मैथिली ठाकुर ने बांधा समां
चित्रकूट, 9 अक्टूबर। भारत रत्न नानाजी देशमुख की 106 वीं जयंती पर उनकी कर्मभूमि चित्रकूट में 9 अक्टूबर से 4 दिवसीय ग्रामोदय मेला व शरदोत्सव का आगाज हो चुका है। ग्रामोदय से राष्ट्र उदय की अवधारणा पर लग रहे इस मेला का उद्घाटन केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उच्च शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। रविवार शाम सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय खेल प्रांगण के कार्यक्रम में आयोजित देश की मशहूर गायिका मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंच से समां बांध दिया। अपने सुरीले लोकगीतों से नगर वासियों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। सूफी गीत और भजनों की प्रस्तुति से उन्होंने माहौल में रंग लाने की रही-सही कसर भी पूरी कर दी। महोत्सव को देखने के लिए बड़ी संख्या में सुर-संगीत कद्रदान उमड़े और लोकगीतों पर जमकर झूमे।

केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने उद्बोधन में कहा
केंद्रीय मंत्री ने कहा हम सभी का सौभाग्य है कि रविवार को चित्रकूट में राष्ट्र ऋषि भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयंती पर इस कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। चित्रकूट 21वीं शताब्दी की ओर 1 नया रूप ले रहा है। गांवों के अंदर पढाई कैसे हो संस्कार कैसे हो, इस पर दीनदयाल शोध संस्थान का रोल मॉडल कार्य कर रहा है। पोलियो की टीका लगाने में हमें 30 साल लग गये परंतु आज हमने कोरोना के टीके की 225 करोड़ डोज 2 साल के अंदर लगा दी। आने वाले 2 साल के अंदर हर गांव ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ जायेगा। हम ग्राम पंचायत से शहर क्यों जाते हैं पढ़ने के लिए, चिकित्सा के लिए, आज डिजिटल इंडिया के चलते हम दुनिया के अच्छे अच्छे चिकित्सक से हम गांव में ही बैठकर परामर्श कर सकते हैं। भारत को आत्म निर्भर बनाने के लिए जरूरी है, गांव को आत्म निर्भर बनाना। कोविड-19 में हमने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 150 देशो में कोविड-19 की डोज पहुंचाई है।

अध्यात्म भारतीय संस्कृति की रीढ़- ऊषा ठाकुर
पर्यटन एवं अध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत जैसी भूमि पूरे विश्व में कहीं नहीं है। राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख गांव को स्वावलंबी बनाना इसलिए चाहते थे क्योंकि देश की आत्मा गांव में बसती है। 21वीं सदी का भारत आत्म निर्भर भारत हो, स्वावलंबी भारत हो। भारत कोई जमीन का टुकड़ा नहीं 1 जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। उन्होने कहा कि अध्यात्म भारतीय संस्कृति की रीढ़ है। भारतीय संस्कृति विज्ञान की कसौटी पर कसी हुई है। आने वाले पीढ़ी को इसे जीवन में उतार कर वैदिक पद्धति अपनाना होगा, ताकि वे अपना भविष्य सुरक्षित और सुखमय बना सकें।

नानाजी ने ग्रामोदय की अलख जगाई बृजेंद्र प्रताप सिंह
खनिज संसाधन मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने भाषण में कहा कि राष्ट्र ऋषि नाना जी का चरित्र हमारे जीवन के लिए 1 सीख है। नाना जी ने स्वास्थ्य, शिक्षा और गांवों को लेकर बहुत कार्य किया है। उन्होने ग्रामोदय की जो अलख जगाई, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श के रुप में अपनाया। राष्ट्रऋषि ने अपने विचारों और मूल्यों से कभी भी समझौता नहीं किया।

सतना सांसद गणेश सिंह ने कहा
90 के दशक में जब नाना जी चित्रकूट आए तो उन्होंने ग्राम विकास का ऐसा मॉडल खड़ा किया जिसने लोगों के लिए स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया। जो मॉडल नाना जी ने खड़ा किया यह पूरे भारत के गांव के लिए है, मैं सभी अन्य राज्यों के मंत्री गणों से भी आग्रह करूंगा। यह मॉडल सभी राज्यों के ग्रामों तक अनुकरणीय बने। आयोजन को उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत,सांसद बांदा आरके सिंह पटेल, उत्तरप्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान, ने भी संबोधित किया।












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