MP News chhatarpur: छतरपुर में BJP नेता ने पकड़ी पुलिसकर्मी की कॉलर, जानिए क्या है राहुल गांधी से जुड़ा मामला
Chhatarpur BJP Yuva Morcha: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में राजनीतिक तनाव और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की एक नई घटना ने सोशल मीडिया को हिला दिया है। 21 फरवरी 2026 को भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी द्वारा एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़े जाने का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वे राहुल गांधी का पुतला दहन करने पहुंचे कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस से झड़पते नजर आ रहे हैं।
इस घटना ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या वर्दी पर हाथ डालना जायज है या नहीं।

जानकारी के अनुसार, युवा मोर्चा के कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी के नेतृत्व में छत्रसाल चौराहे पर राहुल गांधी का पुतला दहन करने पहुंचे थे। पुलिस ने पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि नीरज चतुर्वेदी एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़े हुए हैं और उनसे तीखे स्वर में बात कर रहे हैं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था, जिसमें शहर के कई थानों के टीआई, ट्रैफिक प्रभारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में ट्रैफिक टीआई सहित कुछ आंदोलनकारी भी प्रभावित हुए।
वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में सवाल उठने लगे हैं कि वर्दी पर हाथ डालने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कई यूजर्स और विपक्षी कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि आला अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है या नहीं। कुछ लोग इसे पुलिस की मजबूती का अपमान बता रहे हैं, तो कुछ इसे भीड़ में हुई अनजाने की घटना मान रहे हैं। इस घटना ने जिले में राजनीतिक आंदोलनों के दौरान पुलिस के साथ होने वाले टकरावों की पुरानी यादें भी ताजा कर दी हैं।
नीरज चतुर्वेदी ने वीडियो पर सफाई देते हुए कहा कि वे और उनके कार्यकर्ता पुलिस व प्रशासन का पूरा सम्मान करते हैं। उनका तर्क है कि उस समय भीड़ बहुत ज्यादा थी और पुलिस पुतला छीनने की कोशिश कर रही थी। वे पुतला बचाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान धक्का-मुक्की में किसी कार्यकर्ता ने गिरने से बचने के लिए सहारा लिया और अनजाने में पुलिसकर्मी की वर्दी या कॉलर हाथ में आ गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार से वर्दी का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। नीरज चतुर्वेदी ने आगे कहा कि भीड़ में कोई भी व्यक्ति गिरकर घायल हो सकता था, इसलिए जो हुआ वह पूरी तरह बचाव की स्थिति में अनजाने में हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि लोग इस वीडियो को अपने अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं और उसे उसी हिसाब से पेश कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब छतरपुर जिले में राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आई हों। कैलाश विजयवर्गीय की प्रतीकात्मक शवयात्रा, विभिन्न पुतला दहन कार्यक्रमों, विद्यार्थी परिषद के प्रदर्शनों, वकीलों के आंदोलनों और चक्का जाम जैसे आयोजनों में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो चुके हैं। वहीं, बिजावर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजा और अधिग्रहण को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजे जाने की कार्रवाई की भी तुलना हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का स्वरूप क्यों अलग दिखाई देता है।
इस पूरे मामले पर राजनीतिक विश्लेषक और आम नागरिक दोनों ही कह रहे हैं कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं मिलनी चाहिए। कानून सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस वीडियो की जांच कर रहा है और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने वाला है। इस घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक प्रदर्शनों, पुलिस की भूमिका और कानून के समान अनुपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छतरपुर के इस विवाद ने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने की संभावना है।












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