जानिए मछली परिवार की एक और संपत्ति पर क्या चलेगा बुलडोजर, पशुपालन विभाग की 65 एकड़ जमीन पर कब्जा साबित
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अनंतपुरा कोकता क्षेत्र में पशुपालन विभाग की 65 एकड़ सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। तीन दिनों तक चले सीमांकन कार्य के बाद प्रशासन ने पुष्टि की है कि कुल 65 एकड़ में से करीब 6 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है।
इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यहां खड़े करोड़ों रुपये के स्ट्रक्चर में एक तीन मंजिला मिडिल स्कूल की बिल्डिंग भी शामिल है, जिस पर अब मछली परिवार के दखल की जांच शुरू हो गई है। यह परिवार पहले से ही ड्रग तस्करी, हथियार तस्करी और अन्य अपराधों के आरोपों में घिरा हुआ है, और हाल ही में उनकी कई संपत्तियां जमींदोज की जा चुकी हैं।

प्रशासन के अनुसार, इस अतिक्रमण में 40 से अधिक बिल्डिंग, प्लॉट, 30 दुकानें, एक पेट्रोल पंप, एक स्कूल और दो-तीन कॉलोनियां शामिल हैं। सीमांकन कार्य पूरा होने के बाद अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पेश की जाएगी। यदि कब्जाधारी जमीन खाली नहीं करते, तो प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने शहर में हलचल मचा दी है, क्योंकि मछली परिवार का नाम लगातार विवादों में आ रहा है। आइए, इस मामले को विस्तार से समझते हैं।
सरकारी जमीन पर लंबे समय से कब्जे की शिकायतें
भोपाल के अनंतपुरा कोकता इलाके में पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग की यह 65 एकड़ जमीन (कुछ रिपोर्ट्स में 99 एकड़ का जिक्र) लंबे समय से अतिक्रमण की शिकार रही है। विभाग ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर सीमांकन की मांग की थी, क्योंकि यहां पर अवैध निर्माण और कॉलोनियां काटने की शिकायतें मिल रही थीं। गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सीमांकन कार्य तीन दिनों तक चला, जिसमें 3 राजस्व निरीक्षक और 12 से अधिक पटवारियों की टीम लगी हुई थी। इस दौरान पशुपालन विभाग की जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जे का खुलासा हुआ।
प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन पर मछली परिवार समेत 20 से अधिक लोगों ने कब्जा किया हुआ है। मछली परिवार, जो ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों में आरोपी है, की यहां कई संपत्तियां हैं। हाल ही में, 21 अगस्त को उनकी 25 करोड़ रुपये की तीन मंजिला कोठी को जमींदोज किया गया था, जो सरकारी जमीन पर बनी थी। इससे पहले 30 जुलाई को भी 100 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से उनके अतिक्रमण हटाए गए थे। अब पशुपालन विभाग की इस जमीन पर भी उनका दखल सामने आ रहा है।
सीमांकन में क्या-क्या सामने आया: 6 एकड़ पर पक्का कब्जा
तीन दिनों के सीमांकन कार्य में प्रशासन को चौंकाने वाले तथ्य मिले। कुल 65 एकड़ में से करीब 6 एकड़ पर अवैध कब्जा साबित हो गया है। यहां खड़े स्ट्रक्चर की कीमत करोड़ों में है, जिसमें आवासीय बिल्डिंग, दुकानें और कॉलोनियां शामिल हैं। विशेष रूप से, डायमंड सिटी में बनी तीन मंजिला मिडिल स्कूल बिल्डिंग पर संदेह है। यह बिल्डिंग 1,500 से 2,000 स्क्वायर फीट जमीन पर बनी है और अधिकारियों को आशंका है कि मछली परिवार का इसमें अप्रत्यक्ष दखल है। स्कूल से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सीमांकन रिपोर्ट में 40 बिल्डिंग, कई प्लॉट, 30 दुकानें, एक पेट्रोल पंप और दो-तीन कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कई निर्माण टीएंडसीपी अप्रूव्ड हैं, लेकिन आधारभूत जमीन सरकारी है। सवाल उठ रहे हैं कि नगर निगम और टीएंडसीपी ने कैसे परमिशन दी। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट होगा कि किस रकबे पर किसका कितना कब्जा है।
मछली परिवार का पक्ष: कोई कब्जा नहीं, जांच में कोई आपत्ति नहीं
मछली परिवार ने इस मामले में अपना पक्ष रखा है। शावेज अहमद की ओर से वकील विशेष नामदेव ने गोविंदपुरा एसडीएम को आवेदन दिया कि उनके या उनके परिजनों का खसरा नंबर-43, 44, 49/19, 50/21, 51/8, 54/43, 55/44, 57/43, 58/8, 60/36, 79/3 पर कभी कोई स्वामित्वाधिकार, कब्जा या अतिक्रमण नहीं रहा है और न ही वर्तमान में है। उन्होंने कहा, "यदि किसी कारणवश मेरे या परिवार के विरुद्ध उक्त भूमि संबंधित कब्जे या अतिक्रमण का संदेह, अभियोग प्रस्तुत किया गया है तो वह पूर्णत: असत्य, निराधार और विधिक दृष्टि से अवैध है। इस जमीन के सीमांकन, जांच या किसी भी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई में मेरी या परिवार की कोई आपत्ति नहीं है।"
हालांकि, प्रशासन को परिवार के अप्रत्यक्ष दखल की आशंका है, खासकर स्कूल बिल्डिंग पर। परिवार के सदस्य यासीन और शाहवर मछली पहले से ही जेल में हैं, और उनकी अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। परिवार के वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, लेकिन सुनवाई टल गई है।
प्रशासन की आगे की योजना: रिपोर्ट तैयार, नोटिस और तोड़फोड़
गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने कहा, "सीमांकन करने के बाद अब रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।" शुक्रवार को सीमांकन पूरा होने के बाद शनिवार को पटवारियों की टीम विस्तृत रिपोर्ट बनाने में जुटी है। यह रिपोर्ट एसडीएम के पास पहुंचेगी, फिर सोमवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के सामने रखी जाएगी।
इसके बाद चिन्हित कब्जाधारियों को पशुपालन विभाग से नोटिस भेजे जाएंगे। यदि वे जमीन खाली नहीं करते, तो प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी। एडीएम अंकुर मेश्राम ने कहा कि यदि सीमांकन में किसी का अवैध कब्जा मिलता है, तो उसे तत्काल हटाया जाएगा। प्रशासन ने पहले ही 20 लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
मछली परिवार का साम्राज्य: ड्रग्स से लेकर सरकारी जमीन तक
मछली परिवार भोपाल में ड्रग तस्करी, हथियार तस्करी, यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरा है। उनके रसूख के दम पर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया गया। हाल ही में, उनकी 125 करोड़ की संपत्तियां जमींदोज की गईं। परिवार के गुर्गे सरकारी जमीनों पर कब्जा कर दान पत्र पर बेच रहे थे। हथाईखेड़ा डैम के पास वन विभाग की जमीन पर भी उन्होंने कॉलोनी काटी थी।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि कब्जे से मुक्त जमीन को अब प्रशासन के संरक्षण में लिया जाएगा, और मलबा हटाकर तार फेंसिंग की जाएगी। परिवार के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया: बहस छिड़ी
यह मामला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। लोग सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन की कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, लेकिन कुछ परिवार के पक्ष में भी बोल रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "मछली परिवार का साम्राज्य ढह रहा है, लेकिन जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।" कुल मिलाकर, यह घटना सरकारी जमीनों की सुरक्षा और अपराधियों के रसूख पर सवाल उठा रही है।












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