वाह रे नियम! आवेदक एक एग्जाम के लिए योग्य दूसरे के लिए अयोग्य
भोपाल। मध्य प्रदेश में लिपिक भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश में दो विभागों ने लिपिक भर्ती में दो अलग-अलग परीक्षाओं में परीक्षार्थियों के लिए दो तरह के नियम बनाए हैं। विभाग द्वारा आवेदकों से हाई कोर्ट में भर्ती के लिए टाइपिंग डिप्लोमा मांगा गया है तो पीईबी ने पुलिस विभाग में बाबू की भर्ती के लिए सीपीसीटी डिप्लोमा अनिवार्य कर दिया है। पीईबी के इस नियम के चलते हजारों की संख्या में टाइपिंग डिप्लोमाधारी नौकरी की दौड़ से बाहर हो गए हैं।

प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (PEB) मप्र पुलिस विभाग में 420 पदों पर लिपिकों की भर्ती परीक्षा आयोजित कर रहा है। इसके लिए 15 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। इस भर्ती के लिए परीक्षा 7-8 अक्टूबर को होगी। पीईबी ने परीक्षा के लिए शैक्षणिक योग्यता पुरानी 11वीं या नई 12वीं उत्तीर्ण मांगी है। पीईबी ने कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (सीपीसीटी) पास होना अनिवार्य किया है। जिसके चलते टाइपिंग पास करने वाले हजारों प्रतिभागी अपात्र माने जाएंगे।
इस पूरे मामले में सबसे मजेदार बाद यह है कि इस तरह की भर्ती अगस्त में मप्र हाईकोर्ट में भी की गई है। तब हाईकोर्ट ने् लिपिकों पदों के लिए परीक्षा में टाइपिंग डिप्लोमा पात्रता की मांग की थी। पीईबी के इस नियमों के चलते करीब 50 हजार योग्य उम्मीदवार पुलिस विभाग में क्लर्क के पदों पर नौकरी की रेस से बाहर हो गए हैं। आपको बता दें कि ये वे लोग हैं, जिनके पास टाइपिंग का डिप्लोमा था। आपको बता दें कि इन दावेदारों की टाइपिंग स्पीड 100 शब्द प्रति मिनट तक है।












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