MP News: माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में NSUI ने की दलित समाज से कुलगुरु बनाने की मांग
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में दलित समाज से कुलगुरु बनाने की मांग ने सियासी हलचल मचा दी है। इस मांग को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने उठाया है, और उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में दलित समाज से आने वाले योग्य व्यक्तित्व को कुलगुरु बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस के छात्र संगठन द्वारा यह मांग उस समय उठाई गई है जब देश और प्रदेश में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी के योगदान और उनकी विरासत पर व्यापक बहस चल रही है।

दलित समाज के प्रति सरकार की नीतियों पर सवाल
NSUI प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वे दलितों और बाबा साहेब आंबेडकर जी का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "देश के सबसे बड़े पत्रकारिता विश्वविद्यालय में लगातार दलित छात्रों और शिक्षकों का अपमान किया जा रहा है।" चौकसे का कहना है कि इस कठिन समय में कांग्रेस और एनएसयूआई दलित समाज के साथ खड़े हैं और उनका समर्थन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह विश्वविद्यालय भारत के सबसे महत्वपूर्ण मीडिया संस्थानों में से एक है, और ऐसे संस्थान में दलित समाज से एक योग्य व्यक्ति को कुलगुरु बनाना सामाजिक समरसता का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
आवश्यकता है सामाजिक समरसता के उदाहरण की
NSUI प्रदेश सह सचिव अमन पठान ने कहा कि सरकार लगातार पिछड़े वर्गों का अपमान कर रही है। ऐसे में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के सम्मान में दलित समाज से एक कुलगुरु का नियुक्ति करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उनका मानना है कि इस कदम से समाज में एकता और समानता का संदेश जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि, "हमें उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति महोदय और मुख्यमंत्री महोदय इस जायज मांग पर गौर करेंगे और बाबा साहब के सम्मान में उचित निर्णय लेंगे।"
संपूर्ण समाज के लिए समानता का सपना
इस संबंध में विश्वविद्यालय के NSUI प्रभारी तनय शर्मा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से पूरे समाज को समानता का अधिकार दिया था। उनका उद्देश्य था कि समाज में कोई भी वर्ग नीचा न महसूस करे और सभी को समान अवसर मिलें। शर्मा ने इस पत्र में जोर देते हुए कहा कि "शैक्षिक क्षेत्र में दलित समाज का नेतृत्व होना जरूरी है।" उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में दलित समाज से कुलगुरु की नियुक्ति सामाजिक समरसता का बेहतरीन उदाहरण पेश कर सकती है।
कुलगुरु की नियुक्ति से मिल सकता है सामाजिक बदलाव का संकेत
आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए, NSUI का मानना है कि उनके आदर्शों और विचारों को सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं बनाना चाहिए, बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में लागू करना चाहिए। यदि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में दलित समाज से कुलगुरु की नियुक्ति होती है, तो यह न सिर्फ बाबा साहेब के प्रति सम्मान होगा, बल्कि समाज में समानता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करेगा।
इस मुद्दे ने विश्वविद्यालय में और राज्य सरकार में एक नई बहस को जन्म दिया है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मांग पर विचार करेंगे और इसे लागू करने के लिए उचित कदम उठाएंगे। कांग्रेस और NSUI का कहना है कि यह कदम सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि समाज में समानता और समरसता की दिशा में एक ठोस कदम होगा।
अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मांग को गंभीरता से लेते हैं और समाज में समानता की दिशा में एक कदम और बढ़ाते हैं। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है और आने वाले समय में इससे जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में इस प्रस्ताव को लेकर जो बहस चल रही है, वह यह साबित करती है कि आज भी भारत में दलित समाज की सशक्त भागीदारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर जनमानस की प्रतिक्रिया और सरकारी कदमों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या इस महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।












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