बेंगलुरु: 48 घंटे तक अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर बेड के लिए इंतजार करता रहा मरीज, हालत गंभीर

बेंगलुरु, मई 11: ऑक्सीजन सपोर्ट पर गंभीर रूप से बीमार कोविड-पॉजिटिव महिला को 48 घंटे से अधिक समय तक बेंगलुरु के येलहनका जनरल हॉस्पिटल के बाहर फुटपाथ पर इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यहां तक ​​कि उसके बेटे ने उसके लिए कोविड बिस्तर तलाने की बहुत कोशिश की थी। जिसके बाद आखिरकार रविवार शाम को परिवार एक बिस्तर खोजने में कामयाब रहा और उसे फुटपाथ से अस्पताल के बेड पर ट्रांसफर कर दिया गया। सोमवार दोपहर कोरोना मरीज महिला को जनप्रिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

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57 वर्षीय जलजा प्रसाद को शुक्रवार रात उसका बेटा मंजू प्रसाद अस्पताल में लाया था। उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। विद्यारण्यपुरा निवासी जलजा प्रसाद एक कारखाने में दो दशकों से हाउसकीपिंग स्टाफ की नौकरी करती है, जो प्लास्टिक के दरवाजे और खिड़कियां बनाती है। बुधवार रात को उन्हें तेज बुखार आया। फिर शुक्रवार को उनकी हालत और खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें येलहनका जनरल अस्पताल लाया, जहां डॉक्टरों ने उनसे कहा कि यहां कोई कोवि़ड बेड नहीं है।

मरीज की स्थिति इतनी खराब की थी वो अस्पताल के बाहर एक दुकान के सामने ही गिर गई और सांस लेने के लिए संघर्ष करती रही, जिसके बाद उनके बेटे मंजू प्रसाद ने डॉक्टरों से मदद की गुहार लगाई, जहां उसे एक ऑक्सीजन सिलेंडर दिया गया, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कहा कि उनके पास कोई बेड नहीं है, इसलिए अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा सकता है।

मंजू ने अपनी मां की दुर्दशा का वीडियो बनाकर अपने नियोक्ता अर्पित शेट्टी को भेजा, जिन्होंने सोशल मीडिया पर उनके लिए एक बिस्तर के लिए अनुरोध किया। अर्पित ने कहा कि मैं बीबीएमपी हेल्पलाइन और अन्य सभी जगहों पर फोन करता रहा, लेकिन रविवार शाम तक कोई उम्मीद नहीं थी। 48 से अधिक घंटों के बाद येलहनका अस्पताल के अधिकारियों ने उसे एक सामान्य बिस्तर दिया और उसे रविवार की रात को ट्रांसफर कर दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी स्थिति और बिगड़ती रही। उन्हें एक वेंटिलेटर के साथ आईसीयू सुविधा की आवश्यकता थी, लेकिन बताया गया कि वो उपलब्ध नहीं है।

इसके बाद अर्पित और क्षेत्र में कई कोविड वॉलियंटर्स के प्रयासों के बाद बनासवाड़ी में जनप्रिया अस्पताल में एक आईसीयू बिस्तर बीबीएमपी हेल्पलाइन के माध्यम से सोमवार दोपहर को मिला, जहां दोपहर 1 बजे वेंटिलेटर-सपोर्ट सिस्टम पर उनको शिफ्ट कर दिया गया है। बेटे मंजू को उम्मीद है कि उनकी मां को अब कुछ नहीं होगा।

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