जबरन धर्म परिवर्तन करवाने के मामले में कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा, महज 1 महीना 9 दिन में मिला न्याय
Forced Conversion In Balrampur : पीड़िता व उसके चार नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर इस्लाम धर्म कबूल कराने वाले मौलाना को कोर्ट ने 10 वर्ष का कारावास व ₹50000 अर्थदंड की सजा सुनाई है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में धर्मांतरण के मामले में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पीड़िता व उसके चार नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर इस्लाम धर्म कबूल कराने वाले मौलाना को कोर्ट ने 10 वर्ष का कारावास व ₹50000 अर्थदंड की सजा सुनाई है। वही न्यायालय ने पीड़िता के पति वादी मुकदमा विष्णु को ₹500000 क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। साथ ही आरोपी जमील को न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश विधि धर्म परिवर्तन अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के अंतर्गत सजा सुनाई गई है।

दो नाबालिग बेटों का खतना भी करा दिया
बता दें कि धर्मांतरण के मामले में यूपी में संभवत ये पहली सजा किसी कोर्ट के द्वारा सुनाई गई है। मामला बलरामपुर जिले के जारवा कोतवाली क्षेत्र के हल्लौर गांव का है। जहां पर मौलाना जमील ने इसी गांव की मंजू देवी व उसके चार नाबालिक बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया था। पीड़ित का पति काम के सिलसिले में बाहर रहता है और मंजू देवी मौलाना जमील के यहां काम करती थी। उसी का फायदा उठाकर आरोपी मौलाना ने धर्म परिवर्तन कराते हुए उसके दो नाबालिग बेटों का खतना भी करा दिया और सभी का नाम भी परिवर्तन करा दिया था। चार नाबालिग बच्चों में दो नाबालिग बेटियां भी हैं। धर्मांतरण के समय मंजू देवी का नाम जमीरुन्निसा, 10 वर्षीय बेटे अमित का नाम तौफीक, 5 वर्षीय बेटे संतोष का नाम रेहान, 8 वर्षीय बेटी लाली का नाम अमीरुन्निसा व डेढ़ वर्षीय बेटी छुटकी का नाम कलीमुन्नीसा रख दिया था। जब इस मामले की जानकारी पीड़िता मंजू देवी के पति विष्णु को हुई तो उसने इस संबंध में कोतवाली जरवा में 16 जून 2022 को मुकदमा पंजीकृत कराया था।

पुलिस का बड़ा योगदान, आरोपी मौलाना को सजा
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस का बड़ा योगदान रहा है। समय पर सबूत और गवाह पुलिस के द्वारा न्यायालय में पेश किया गया, जिससे आरोपी को न्यायालय के द्वारा सजा सुनाई गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने धर्मांतरण के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त जमील मौलाना को जेल भेज दिया है और उन्होंने कहा कि जिला न्यायालय के द्वारा एक अहम फैसला सुनाया गया है। जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। उन्होने यह भी बताया कि 12 जून 2022 को धर्म परिवर्तन के मामले में अभियुक्त जमील के खिलाफ कोतवाली जरवा में मुकदमा पंजीकृत हुआ था, आरोपी के खिलाफ 16 दिसंबर 2022 को इस मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप तय हुआ था। 1 महीना 9 दिन में ही न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ फैसला सुनाया।
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हमें न्याय मिला है और न्यायपालिका पर हमें हमेशा भरोसा रहेगा
जब इस संबंध में पीड़िता मंजू देवी के पति से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मेरी पत्नी सहित 4 बच्चों का धर्म परिवर्तन करवाया गया था। जिसमें मेरे द्वारा 6 जून 2022 को कोतवाली जरवा में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। वहीं अब न्यायालय के द्वारा फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष का कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। बता दें कि जबरन महिला को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने के प्रकरण में अभियुक्तों को न्यायालय द्वारा 10 वर्ष के कारावास व ₹50000 अर्थदंड व 500000 रुपए प्रतिकर जमा करने की सजा सुनाई। पीड़ित पति का कहना है कि हमें न्याय मिला है और न्यायपालिका पर हमें हमेशा भरोसा रहेगा।









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