पचास साल बाद असम-मेघालय सीमा विवाद सुलझने की उम्मीद

नई दिल्ली। असम की राजधानी गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मेघालय के अपने समकक्ष कोनराड संगमा से बातचीत के बाद दावा किया कि जिन 12 इलाकों को लेकर विवाद है उनमें से छह को 15 जनवरी तक सुलझा लिया जाएगा. मेघालय के मुख्यमंत्री ने भी यही दावा किया है. दो महीने में इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच मुख्यमंत्री स्तर की यह दूसरी बैठक थी.
अगले साल ही मेघालय के गठन को 50 साल पूरे हो रहे हैं. दोनों राज्य सरकारों ने इस साल अगस्त में अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कुछ क्षेत्रीय समितियों का गठन किया था. उनमें से दो ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. संगमा ने बताया कि बाकी समितियां भी दिसंबर के आखिर तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. उसके बाद 15 जनवरी तक कम से कम छह विवादित इलाकों पर समझौता हो जाएगा.
मुख्यमंत्रियों की बैठक
गुवाहाटी में आयोजित बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच 15 जनवरी तक 12 विवादित इलाकों में से कम से कम छह पर समझौता करने पर सहमति बनी है. मेघालय के उप-मुख्यमंत्री प्रेस्टोन टेनसांग बताते हैं, "दोनों राज्यों की ओर से गठित तमाम क्षेत्रीय समितियां 31 दिसंबर तक संबंधित मुख्यमंत्रियों को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगी. उसके बाद दोनों मुख्यमंत्रियों की फिर से बैठक होगी. हमें उम्मीद है कि 15 जनवरी तक कम से कम छह विवादित इलाकों पर समझौता हो जाएगा."
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है, "हम अपने पड़ोसियों के साथ पुराने सीमा विवाद सुलझाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. इसी के तहत मेघालय के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक आयोजित की गई." उनके मुताबिक, पहले उन छह स्थानों को चुना गया है जहां जटिलताएं सबसे कम हैं. पहले चरण में जिन छह स्थानों पर समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा उनमें ताराबाड़ी, गिजांग, फाहला, बाकलापाड़ा, खानापाड़ा और रात छेरा शामिल हैं. हिमंत ने भरोसा जताया कि मेघालय के अलावा दूसरे राज्यों के साथ असम के लंबे सीमा विवाद को भी शीघ्र सुलझा लिया जाएगा.
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा बताते हैं, "हमारी बातचीत काफी सकारात्मक रही है और सीमा विवाद का शीघ्र समाधान होने की उम्मीद है." सीमा विवाद के निपटारे के लिए अगस्त में असम और मेघालय ने दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रीय समितियों का गठन किया था. इन समितियों को पांच बिंदुओं के तहत पड़ताल करनी थी. वह हैं, ऐतिहासिक तथ्य, जातीयता, प्रशासनिक सुविधा, भूमि की निकटता, इच्छा और लोगों की भावनाएं.
असम का मेघालय के अलावा नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के साथ भी लंबे अरसे से सीमा विवाद है. नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के साथ सीमा विवाद के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो से सीमा विवाद पर बातचीत के लिए शीघ्र दिल्ली जाने वाले हैं.
गठन के समय से ही विवाद
असम के साथ मेघालय का सीमा विवाद वर्ष 1972 में इस राज्य के गठन जितना ही पुराना है. मेघालय कम से कम 12 इलाकों पर अपना दावा ठोकता रहा है. वह इलाके फिलहाल असम के कब्जे में हैं. दोनों राज्यों ने एक नीति अपना रखी है, जिसके तहत कोई भी राज्य दूसरे राज्य को बताए बिना विवादित इलाकों में विकास योजनाएं शुरू नहीं कर सकता. यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब मेघालय ने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दी. उक्त अधिनियम के तहत असम को जो इलाके दिए गए थे उसे मेघालय ने खासी और जयंतिया पहाड़ियों का हिस्सा होने का दावा किया था. सीमा पर दोनों पक्षों के बीच अक्सर झड़पें होती रही हैं. नतीजतन दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों के विस्थापन के साथ ही जान-माल का भी नुकसान हुआ है.
इस मुद्दे पर अतीत में कई समितियों का गठन किया गया और दोनों राज्यों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई. लेकिन अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. सीमा विवाद की जांच और उसे सुलझाने के लिए वर्ष 1985 में वाई.वी.चंद्रचूड़ समिति का गठन किया गया था. लेकिन उसकी रिपोर्ट भी ठंढे बस्ते में है. मेघालय के तमाम राजनीतिक दलों ने केंद्र से कहा था कि वह 2022 से पहले इस विवाद को सुलझाने की पहल करे. वर्ष 2022 में मेघालय के गठन को 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे.
राजनीतिक पर्यवेक्षक एस. के. मराक कहते हैं, "अगर दोनों सरकारों के दावों के मुताबिक 15 जनवरी तक 12 में से छह स्थानों पर भी समझौता हो जाता है तो यह पूर्वोत्तर राज्यों के दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगा."
Source: DW
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