अनुमान से दस साल पहले खत्म हो जाएगी आर्कटिक की बर्फ
वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि arctic में बर्फ अनुमान से दस साल पहले ही खत्म हो जाएगी. और ऐसा कार्बन उत्सर्जन रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद होगा.

आर्कटिक महासागर पर बनी बर्फ की परत तेजी से घट रही है और 2030 के दशक में यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी. पहले अनुमान था कि आर्कटिक में बर्फ 2040 के दशक में खत्म होगी लेकिन नया अध्ययन कहता है कि बर्फ अनुमान से दस साल पहले ही खत्म हो जाएगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिशें भी ऐसा होने से रोक नहीं पाएंगी.
उपग्रहों से 40 साल तक मिले डेटा के विश्लेषण के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पहुंचे हैं. इस डेटा के जरिये वैज्ञानिकों ने उत्तरी ध्रुव के आसपास के इलाके में समुद्र पर जमी बर्फ की परत में आ रही गिरावट का अध्ययन किया. अध्ययन में पता चला कि अब हालात वहां पहुंच चुके हैं कि कार्बन उत्सर्जन में कितनी भी कमी आ जाए, 2030 से 2050 के बीच ऐसा सितंबर महीना आ जाएगा, जबकि आर्कटिक में कोई बर्फ नहीं होगी.
कैसे हुआ शोध?
यह शोध दक्षिण कोरिया की पोहांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मिन सेऊंग की के नेतृत्व में हुआ. मंगलवार को इसकी रिपोर्ट नेचर कम्यूनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुई है. अपने शोध के लिए शोधकर्ताओं ने 1979 से 2019 के बीच आर्कटिक में बर्फ की मोटाई के हर महीने के आंकड़ों का अध्ययन किया. फिर इन आंकड़ों की तुलना कंप्यूटर सिम्युलेशन के मॉडल से करके भविष्य का अनुमान लगाया गया.
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सितंबर के मध्य तक आर्कटिक में बर्फ की परत की मोटाई सबसे कम होती है. शोधकर्ता कहते हैं कि संभवतया अगले दशक में ही वह सितंबर आ जाएगा, जब आर्कटिक में बर्फ बिल्कुल नहीं होगी.
पहले के शोध से अलग
संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण पर काम करने वाली समिति आईपीसीसी ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट जारी की थी जिसमें 2021-23 के लिए नतीजे बताये गये थे. उस रिपोर्ट में कहा गया था कि इस सदी के मध्य से पहले आर्कटिक में सितंबर में बर्फ खत्म नहीं होगी. हालांकि उस रिपोर्ट में यह शर्त रखी गयी थी कि बर्फ का खत्म होना ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की मात्रा पर निर्भर करेगा.
उस रिपोर्ट से आगे जाते हुए ताजा अध्ययन कहता है कि अब ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कितना भी कम हो जाए, आर्कटिक में सितंबर में बर्फ के खत्म होने की घटना पिछले अनुमान से दस साल पहले ही हो जाएगी. मिन के नेतृत्व में प्रकाशित शोध पत्र में वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका असर मानव समाज के पारिस्थितिकी तंत्र पर बहुतायत में देखने को मिलेगा और मनुष्य को खुद को गर्मी खत्म होते होते आर्कटिक में बर्फ के पूरी तरह खत्म हो जाने की परिस्थितियों के लिए तैयार कर लेना चाहिए.
वीके/एए (डीपीए/एपी)
Source: DW
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