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इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी की कुलपति बनीं प्रो. संगीता श्रीवास्तव, राज्यपाल ने की नियुक्ति

इलाहाबाद/प्रयागराज। प्रयागराज स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय (इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी) में नये कुलपति की नियुक्ति हो गयी है। प्रो. संगीता श्रीवास्तव को यूनविर्सिटी का कुलपति बनाया गया है। राज्यपाल राम नाइक के द्वारा अपने विशेषाधिकार के तहत 3 साल के लिये संगीता श्रीवास्तव की नियुक्ति की गयी है। राज्यपाल की ओर से आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद ही प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कार्यभार संभाला लिया है। मीडिया से बातचीत करते हुये उन्होंने नई शिक्षा नीति को लागू करना अपनी प्राथमिकता बताते हुये कहा कि संबद्ध कॉलेज में अब फीस मनमानी को खत्म किया जायेगा। गौरतलब है कि प्रो. संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष रही हैं और अब उन्हें राज्य विश्वविद्यालय की कमान सौंपी गयी है।

प्रो. संगीता श्रीवास्तव का परिचय

प्रो. संगीता श्रीवास्तव का परिचय

प्रो. संगीता श्रीवास्तव लंबे समय से शिक्षा जगत में बड़ा नाम रहा है। प्रयागराज की रहने वाली प्रो. संगीता श्रीवास्तव की शुरुआती शिक्षा इसी शहर से हुई और उन्होंने अपनी इंटर तक की पढ़ाई प्रयागराज के जाने माने स्कूल सेंट मेरीज कॉन्वेंट से की। इंटर के बाद वह यमुनापार के नामी कॉलेज एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में दाखिले के लिये पहुंच गईं और यहां से उन्होंने बीएससी पास किया। हालांकि परास्नातक की पढ़ाई के लिये वह बाहर निकली और मध्य प्रदेश के जबलपुर विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई को शैक्षिक आयम देने के लिये परिजनों के निर्देश पर संगीता ने वापस प्रयागराज का ही रुख किया और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्रो. पीसी गुप्ता के निर्देशन में पीएचडी किया।

प्रो. संगीता श्रीवास्तव की उपलब्धियां

प्रो. संगीता श्रीवास्तव की उपलब्धियां

प्रो. संगीता श्रीवास्तव पिछले 30 सालों से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की चर्चित शिक्षक हैं और अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने कयी बड़े मुद्दों पर न सिर्फ आवाज उठायी, बल्कि अपने नाम कयी उपलब्धियां भी दर्ज करायी हैं। प्रो. संगीत श्रीवास्तव इविवि की दसवीं शिक्षक हैं, जिन्हें किसी विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। वर्तमान में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की प्रवेश समिति की चेयरपर्सन प्रो. संगीता ने यूनिवर्सिटी में महिला उत्पीड़न के लिये बड़े स्तर पर काम किया और इसके लिये टीम भी गठित की। सी-कैश की बनाई गयी टीम की वह अध्यक्ष रही। जबकि वह लंबे अर्से से एकेडमिक कौंसिल, एग्जीक्यूटिव कौंसिल समेत कई कमेटियों की सदस्य हैं। वर्ष 1989 में लेक्चरर के पद पर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ज्वॉइनिंग की थी और गृह विज्ञान विभाग में अपनी सेवा देना शुरू किया था। हालांकि 1989 के त्तकालीन समय में गृह विज्ञान को अलग मान्यता नहीं थी, बल्कि यह बायोकेमिस्ट्री विभाग का एक हिस्सा था। लेकिन, प्रो. संगीता श्रीवास्तव की ही देन है कि उन्होंने गृह विज्ञान के लिये अलग मुहिम छेड़ी और उन्हें इसमें सफलता भी मिली।

गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष बनी थीं

गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष बनी थीं

लंबी जद्दोजहर के बाद वर्ष 2002 में गृह विज्ञान विभाग को नया भवन मिल गया। डिपार्टमेंट अलग होते ही प्रो. संगीता श्रीवास्तव को गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष बना दिया गया और तब से वह इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन भी कर रही थीं। प्रो. संगीता श्रीवास्तव कार्य कुशलता और क्षमता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने गृह विज्ञान विभाग में शिक्षकों की तैनाती व शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिये जब मुहिम छेड़ी तो यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से उनके प्रोजेक्ट पर सहमति जताई और वर्ष 2018 में गृह विज्ञान विभाग को 8 नए शिक्षक भी मिल गए। फिलहाल उनकी नयी पारी से एक बार फिर से बदलाव व कुछ अलग देखने की उम्मीद नजर आ रही है।

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