Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

PCS-J: दरोगा से बन गए जज, बेहद दिलचस्प है विनायक सोमवंशी के सफलता की कहानी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में यूं तो हर साल सफलता की हजारों कहानियां सामने आती हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी मामले आते हैं, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। ऐसी ही एक कहानी प्रयागराज के कर्नलगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर विनायक सोमवंशी की है, जिन्होंने ड्यूटी के साथ अपनी मेहनत के दम पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस ज्यूडिशरी एग्जाम में सफलता हासिल की है। 587 रैंक के साथ विनायक सोमवंशी का चयन न्यायिक सेवा के लिए हो गया है और अब वह दरोगा से जज बन गए हैं। विनायक की सफलता के बाद उनके डिपार्टमेंट में भी जमकर उत्साह है और पुलिस कप्तान से लेकर तमाम अधिकारी उन्हें सम्मानित कर रहे हैं। उन्हें बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है। सोमवार को पुलिस लाइन में सब इंस्पेक्टर विनायक सोमवंशी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अतुल शर्मा समेत अन्य अधिकारियों ने सम्मानित किया।

बेहद दिलचस्प है विनायक की कहानी

बेहद दिलचस्प है विनायक की कहानी

कर्नलगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर विनायक सोमवंशी की कहानी बेहद दिलचस्प है। उत्तर प्रदेश के छोटे से जिला चंदौली के रहने वाले विनायक ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वह पीसीएस जे की तैयारी करने के लिए दिल्ली चले गए। इसी बीच उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती आई तो कद काठी अच्छी होने के कारण परिजनों व दोस्तों के कहने पर वह दरोगा भर्ती में अपनी योग्यता का आकलन करने के लिए उतरे। अपने पहले ही प्रयास में वह सिलेक्ट भी हो गए। हालांकि, सिलेक्शन के बाद भी विनायक की पढ़ाई का क्रम नहीं रुका और इस बीच काफी लंबे समय तक यह दरोगा भर्ती खिचती चली गई, जिससे पढ़ाई के लिए विनायक को और लंबा समय मिल गया।

जब लगा कि अब रास्ता बंद...

जब लगा कि अब रास्ता बंद...

2015 में दरोगा पद के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई, जिसके बाद उन्हें पढ़ाई के लिए वक्त नहीं मिल पा रहा था। कुछ समस्या भी विनायक के सामने आने लगी और उन्हें लगा कि वह अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे, लेकिन सामने आई समस्या व मौके को भुनाने में विनायक जुट गए और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2017 में उनकी तैनाती प्रयागराज शहर के कर्नल गंज थाने में हुई। मौजूदा समय में विनायक की ड्यूटी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की पुलिस चौकी में है। वह पुलिस चौकी में अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद जब भी कमरे पर जाते हैं, सीधे पढ़ाई पर जुट जाते हैं। अपने दोस्तों और बैचमेट के साथ मौज मस्ती की जगह वह अपना समय किताबों में बिताते हैं और उनके दिमाग में सिर्फ एक ही लक्ष्य चल रहा था कि पीसीएस जे उन्हें क्रैक करना है।

लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नहीं की शादी

लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नहीं की शादी

छोटे-छोटे गांव और शहरों से निकलकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं की स्थिति ज्यादातर एक जैसी नजर आती है। कुछ ऐसी ही स्थिति चंदौली के कुशहा गांव के विनायक की भी थी। वह एक मध्यम किसान त्रिभुवन नाथ सिंह के बेटे थे। हालांकि, मां बाप ने उनकी पढ़ाई में कोई समझौता नहीं किया और बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया। घर में मां सविता सिंह बेटे को दूर जाने से रोकने का प्रयास करती, लेकिन बेटे की बड़ी बातें और सफलता के लिए जोश को देखकर वह भी उसका सपोर्ट करती। दरोगा बनने के बाद घर वाले चाहते थे कि विनायक शादी कर ले, लेकिन विनायक की एक ही जिद थी कि वह पहले अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे उसके बाद ही शादी के विषय में सोचेंगे। फिलहाल, विनायक के घर पर भी बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और अब परिजनों को भी उम्मीद है कि उनके घर में जल्द ही बेटे के लिए शहनाई बजेगी।

'खुद को तैयार करिए, सफलता आप को तैयार करेगी'

'खुद को तैयार करिए, सफलता आप को तैयार करेगी'

अपनी सफलता के बारे में विनायक सोमवंशी सिर्फ और सिर्फ कड़ी मेहनत को तरजीह देते हैं। वह कहते हैं कि कोई भी लक्ष्य पुरुष के साहस से बड़ा नहीं है और हारा केवल वह है जो कभी लड़ा नहीं है। अपने सफर के बारे में विनायक बताते हैं कि बीएचयू से एलएलबी करने का उद्देश्य ही पीसीएस जे की तैयारी करना था और वह लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। दिल्ली में रहकर काफी समय तक उन्होंने तैयारी की, लेकिन जब उत्तर प्रदेश में वह सब इंस्पेक्टर बन गए तब उनकी तैयारी प्रभावित हुई, हालांकि जिस तरीके से उन्होंने कड़ी मेहनत की थी उन्हें पता था कि आज नहीं तो कल वह पीसीएसजे बन जाएंगे। इसीलिए वह ड्यूटी के साथ अपनी पढ़ाई को और धार देते रहे और जब पीसीएस जे की लिखित परीक्षा का समय आया तो अपनी तैयारी को फाइनल टच देने के लिए वह एक महीने की छुट्टी लेकर फिर से दिल्ली चले गए और अब रिजल्ट दुनिया के सामने है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+