योगी आदित्यनाथ का सही नाम क्या है ? HC में याचिका दाखिल करने वाले शख्स को क्यों पड़ा भारी ?

प्रयागराज, 26 अप्रैल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता पर एक लाख का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छह सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने को कहा है। ये रकम प्रयागराज के जवाहरलाल नेहरू रोड के विकलांग आश्रम में जमा की जाएगी।

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    Yogi Adityanath के नाम वाली याचिका खारिज, इलाहाबाद High Court ने लगाया जुर्माना | वनइंडिया हिंदी
    दिल्ली के शख्स ने HC में दाखिल की थी याचिका

    दिल्ली के शख्स ने HC में दाखिल की थी याचिका

    दिल्ली के रहने वाले नमहा की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई नाम लिखे जाते हैं। इस वजह से प्रदेश की 32 करोड़ की जनता के बीच संशय बना रहता है।

    हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, लगाया एक लाख रुपए का जुर्माना

    हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, लगाया एक लाख रुपए का जुर्माना

    याचिका में कहा गया कि चुनाव में नॉमिनेशन के समय आदित्यनाथ पुत्र अवैद्यनाथ लिखा गया, जबकि मुख्य सचिव के ट्विटर हैंडल पर महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज लिखा गया है। कहा गया कि कहीं अजय सिंह बिष्ट तो कहीं आदित्यनाथ योगी, इस प्रकार कई नामों की वजह से जनता के बीच नामों को लेकर दुविधा की स्थिति बनी रहती है। याची ने मांग की थी कि हाईकोर्ट यूपी सरकार को सही नाम ही लिखने का निर्देश जारी करे। मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया है।

    क्यों खारिज की गई याचिका ?

    क्यों खारिज की गई याचिका ?

    इस मामले में सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जनहित याचिका कोई औचित्य नहीं है। बहस की गई कि आदित्यनाथ को निजी तौर पर पक्षकार बनाया गया है। इस कारण जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि याची ने हाईकोर्ट रूल्स के मुताबिक अपनी पहचान स्पष्ट नहीं की है। इस कारण भी याचिका खारिज किए जाने योग्य है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि याची ने सस्ती लोकप्रियता के उद्देश्य से जनहित याचिका दाखिल की है, इस कारण यह खारिज किए जाने योग्य है। याचिका में योगी आदित्यनाथ के अलावा चुनाव आयोग, भारत सरकार, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को भी पक्षकार बनाया गया था।

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