Aligarh: 'बेटा नहीं है तो क्या, मैं दूंगी पापा को मुखाग्नि', तीन बेटियों ने किया अपने पिता का अंतिम संस्कार

सामाजिक, जातीय परंपरा के पक्षधरों के शुरुआती विरोध के बावजूद इन तीन बेटियों ने अपने पिता की चिता को अग्नि भी दी और बाद में सराहना का पात्र भी बनी। मृतक का कोई बेटा न होने के चलते बेटियों ने यह फर्ज अदा किया।

Aligarh three daughters perform last rites gave the main fire to the father

सदियों से चले आ रहे हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार एक स्त्री किसी की चिता को मुखाग्नि नहीं दे सकती। भारतीय संस्कृति में किसी की मौत होने पर उसको मुखाग्नि मृतक का बेटा/भाई/ भतीजा/पति या पिता ही देता है। पर क्या हो अगर किसी के घर में कोई पुरुष अंतिम संस्कार के लिए मौजूद न हो तो? ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश के अलीगढ में, जहां एक व्यक्ति की मौत के बाद उसको मुखाग्नि देने वाला कोई बेटा नहीं था। इसलिए समाज की परंपराओं को दरकिनार करते हुए मृतक की तीन बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

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बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज
कहते हैं घर मे अगर बेटा न हो तो बेटियां ही बेटों का फर्ज अदा करती है। लेकिन कभी-कभी जीवन में परिस्थितियां भी ऐसा करने पर मजबूर कर देती है। ऐसा ही एक वाक्या अलीगढ़ में देखने को मिला, जहां पिता की मौत होने पर बेटा न होने के कारण उसकी तीन बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। दरअसल, अलीगढ़ में सराय निवासी 52 वर्षीय राजकुमार पिछले 9 माह से मुंह के कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। घर में रहकर मजदूरी करने वाले राजकुमार का कोई बेटा नहीं था। उनकी तीन बेटियां थी, जिसमें 18 वर्षीय रति 16 वर्षीय गौरी और 13 वर्षीय चित्रा है।

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इलाज के लिए नहीं थे पैसे
कैंसर की बीमारी होने के बाद राजकुमार का इलाज कराया गया, मगर घर में जीविका चलाने वाला इकलौता व्यक्ति खुद ही बीमार था। घर की आर्थिक काफी ज्यादा ख़राब थी। जब डॉक्टरों ने इलाज आगे चलाने के लिए पैसों की मांग की तो राजकुमार के घरवाले उसका इलाज नहीं करा सके। जिसके चलते रविवार की रात राजकुमार ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण अपना दम तोड़ दिया।

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छोटी बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि
जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से राजकुमार का अंतिम संस्कार चंदनिया स्थित श्मशान घाट में कराया गया। राजकुमार का कोई बेटा ना होने के कारण अंतिम संस्कार में उसके तीनों बेटियों ने भाग लिया। उसकी छोटी बेटी चित्रा ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद तीनों बेटियां अनाथ हो गई। वहीं यह नजारा देख मौके पर मौजूद सभी की आंखे नम हो गई।

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