कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के लिए भटक रही एसिड अटैक विक्टिम, दीपिका पादुकोण के साथ कर चुकी है काम

अलीगढ़। दीपिका पादुकोण के साथ फिल्म 'छपाक' में काम कर चुकीं एसिड अटैक पीड़िता जीतू शर्मा पुलिस में नौकरी कर रहे कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के लिए दर-दर भटक रही हैं। मौत से जूझते अपने पिता को बचाने के लिए जीतू संघर्ष कर रही हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा। जीतू के 55 वर्षीय कांस्टेबल पिता सोमदत शर्मा को कैंसर हो गया है और कोरोना का टेस्ट कराए बगैर अस्पतालों ने इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उसके पिता का एक भारी दुख ये भी है कि बीमारी के कारण कागजों में आमद नहीं कराने पर मैनपुरी पुलिस ने उनको चार महीने से वेतन नहीं दिया है।

क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला

मूल रूप से डिबाई बुलंदशहर के रहने वाली जीतू के पिता सोमदत शर्मा लगभग 15 साल से बरौला जाफराबाद में रह रहे हैं। दिसंबर में उनकी तैनाती मैनपुरी पुलिस लाइन में हुई, जहां से उनको एक थाने में भेजा गया। गले में दर्द होने के कारण वह ज्वॉइन नहीं कर पाए। जांच कराई गई तो उनको गले में खाने की नली में थर्ड स्टेज का कैंसर बताया गया। यहीं से जीतू का संघर्ष शुरू हुआ। अब वह अपने पिता को लेकर अस्पताल दर अस्पताल चक्कर लगा रही हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। दिसंबर से तनख्वाह नहीं मिलने से परिवार में पैसे का भी संकट है।

पानी भी नहीं पी पा रहे जीते के पिता

पानी भी नहीं पी पा रहे जीते के पिता

जीतू पिता की तनख्वाह दिलाने के लिए डीजीपी को पत्र लिख रही हैं। जीतू ने बताया कि अभी तक उसके पिता का इलाज नोएडा के जेपी अस्पताल में चल रहा था। वहां इलाज करा रहे थे। अब कोरोना का संक्रमण बढ़ने के बाद जेपी अस्पताल वाले कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट मांग रहे हैं। बुधवार को एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज के कैंसर डिपार्टमेंट मे दिखाने गए तो वहां भी नहीं देखा गया। मेडिकल कॉलेज वालों ने कहा कि नया मरीज नहीं लेंगे। यहां जिस एंबुलेंस से पहुंचे थे, वह भी छोड़ गया तो चिलचिलाती धूप में पिता को रिक्शे पर लाद कर घर पहुंचे। पिता इस समय पानी भी नहीं पी पा रहे हैं, पानी मुंह से वापस निकल रहा है, क्योंकि कैंसर तीसरे स्टेज का है।

बेटियों पर पिता के इलाज की जिम्मेदारी

बेटियों पर पिता के इलाज की जिम्मेदारी

बता दें, जीतू शर्मा तेजाब हमले की पीड़िता हैं। उनके साथ घर में दो बहन, आठ साल का छोटा भाई और मां हैं। ऐसे में सारा बोझ बेटियों पर ही पड़ा हुआ है। बेटियों ने अलग-अलग कर्ज लेकर पिता के इलाज का बीड़ा उठाया है।

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