श्रीधरन बोले, 'भारत में इंजीनियरों की गुणवत्ता बेहद सामान्य'
अहमदाबाद। 'मेट्रो मैन' के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने देश के इंजीनियरों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियरों की गुणवत्ता बेहद सामान्य बताया है।

भारतीय इंजीनियरों को लेकर श्रीधरन का बड़ा बयान
श्रीधरन ने देश के इंजीनियरिंग कॉलेज और संस्थानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां से निकलने वाले इंजीनियरों की गुणवत्ता बेहद सामान्य है।
शायद यही वजह है कि आईआईटी से निकलने छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशी शिक्षण संस्थाओं का रुख करते हैं या फिर विदेश में ही नौकरी के अवसर तलाशते हैं।
उन्होंने भारतीय इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि आप को खुद अपने लिए अलग और खास मानक तय करने होंगे। इससे प्रधानमंत्री के 5 खरब रुपये के विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में उनका सहयोग मिलेगा।
इंजीनियरिंग कॉलेज और संस्थानों पर उठाए सवाल
श्रीधरन ने कहा कि हमारे देश में इंजीनियर बहुत तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम नहीं हैं। हमारे इंजीनियर पर्याप्त प्रयास नहीं करते जिससे वह नए अनुसंधानों से अवगत हो जाएं। इसीलिए मुझे लगता है कि हमारे देश के इंजीनियरिंग कॉलेज और संस्थान बेहद सामान्य किस्म के इंजीनियर पैदा करते हैं।
बता दें कि ई श्रीधरन पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित हैं। उन्हें कोंकण रेलवे और दिल्ली मेट्रो के प्रोजेक्ट की चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए ये सम्मान दिया गया।
यूएन महिदा मेमोरियल में 'व्यावसायिक नैतिकता और इंजीनियरों की भूमिका' पर लेक्चर देने के लिए ई श्रीधरन पहुंचे थे। ये कार्यक्रम स्टेट चैप्टर ऑफ इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ओर से आयोजित किया गया था।
रिसर्च में हुए खुलासे पर श्रीधरन ने कही अपनी बात
इसी दौरान श्रीधरन ने भारतीय इंजीनियरों को लेकर ये बात कही। उन्होंने इसके लिए एक अध्ययन का हवाला दिया। जिसमें 300 इंजीनियरिंग कॉलेजों को शामिल किया गया था।
उन्होंने बताया कि यहां से निकलने वाले महज 29 फीसदी इंजीनियरों की नौकरी लगती है। वही करीब 30 फीसदी इंजीनियर आगे की पढ़ाई में जुट जाते हैं। वहीं 48 फीसदी इंजीनियरों को नौकरी नहीं मिल पाती। वह बेरोजगार ही रह जाते हैं।












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