गुजरात की नूरजहां बोलीं- मैं जिंदा हूं तो सुषमा जी की वजह से, नहीं तो ओमान में ही मर जाती
अहमदाबाद। सुषमा स्वराज के निधन से देशभर में लोग शोकाकुल हैं। अलग-अलग तबके के बीच सुषमा को उनके योगदान के लिए याद किया जा रहा है। ऐसे में गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली मुस्लिम महिला नूरजहां बानो भी दुखी हैं। नूरजहां बानो का कहना है कि सुषमाजी की वजह से ही मैं आज जिंदा हूं, वरना अरब के ओमान में ही मर जाती।'
बकौल नूरजहां, 'जब मैं वहां फंस गई थी, तो मैंने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया था। मैंने उन्हें खुद के सुरक्षित वतन वापसी कराने की गुहार लगाई थी। सुषमा जी ने एक ट्वीट के आधार पर ही मुझे मदद मुहैया करवा दी। उन्हीं की वजह से आज मैं अपने देश में अपने परिवार के साथ हूं।''

'ब्यूटी पॉर्लर में नौकरी का झांसा देकर ओमान बुलाया था'
बता दें कि, नूरजहां बानो अहमदाबाद शहर के शाहपुर में रहती हैं। वह ओमान तब गई थीं, जब उन्हें वहां के ब्यूटी पॉर्लर में काम करने का ऑफर मिला था। वहां पहुंचने पर उन्हें धोखे का अहसास हुआ। वहां एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें अपनी मेड बनाना चाहा। 'होम सर्विस' के लिए दबाव बनाने लगा। ऐसी परिस्थितियों में नूरजहां एवं उनके साथ की एक अन्य हिंदुस्तानी महिला को खूब प्रताड़ित किया गया।

'जेल में डाल दिया गया, कोई कानूनी मदद नहीं मिली'
शोषण से आहत दूसरी महिला ने आत्महत्या की कोशिश की। तब इस मामले में नूरजहां को ही जेल में डाल दिया गया। नूरजहां को वहां कोई कानूनी मदद भी नहीं मिलने दी गई।

'वहां सोचती थी जेल में ही मर जाऊंगी'
'संकट की इस घड़ी में मैं अल्लाह से दुआ मांग रही थी। मुझे लगा रहा था कि अब जेल में ही मेरी मौत हो जाएगी। तब संयोगवश मुझे तेलंगाना के श्रीनिवासन नामक शख्स ने कहा कि यदि तुम सुषमा जी को ट्वीट कर मदद मांगो तो निकल भी सकती हो। ऐसे में मैंने ट्वीट करते हुए सुषमा जी को एक वीडियो भेजा। जिसे सुषमा जी से गंभीरता से लेते हुए तत्काल ओमान की सरकार से बात की। इसके बाद मैं जेल से छूटी और वापस हिंदुस्तान लौट आई।'

इस महिला के पति को भी समुद्री डकैतों से छुड़वाया
वाराणसी की एक महिला कंचन भारद्वाज ने भी सुषमा स्वराज से जुड़ी बातें साझा की हैं। कंचन भारद्वाज बताती हैं कि 25 मार्च 2016 को मर्चेंट नेवी के इंजीनियर सहित पांच लोगों का समुद्री डाकुओं ने अपहरण कर लिया था। उनमें मेरे पति इंजीनियर संतोष भारद्वाज शामिल थे। हमारी ओर से सुषमा जी से हेल्प मांगी गई। सुषमा को जैसे ही इस बात की जानकारी हुई उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया। आखिर में, 45 दिनों के बाद 11 मई 2016 को सुषमा जी के अथक प्रयास के बाद मेरे पति की रिहाई हो गई। अब ऐसा लग रहा है जैसे मेरे सिर से बड़ी बहन का हाथ हट चुका है।












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