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ताजमहल के खुफिया 22 कमरों की क्या है हकीकत? आखिर क्या है इससे जुड़ा विवाद, जानिए

नई दिल्ली, 14 मई: एक बार फिर दुनिया के सात अजूबों में शुमार आगरा का ताज महल अपने इतिहास को लेकर विवादों में है। 'ताज महल या तेजो महल' का विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने एक याचिका दायर कर मांग की कि आगरा के ताज महल के तहखाने में मौजूद 22 कमरों को खोला जाए, हालांकि हाईकोर्ट ने गुरुवार को फटकार लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। अब इस मामले को याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट लेकर जाने की तैयारी में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ताजमहल के बंद गुप्त 22 कमरों का राज क्या है? जिसको लेकर एक फिर से विवाद छिड़ा हुआ है।

जानिए ताज महल से जुड़ा विवाद?

जानिए ताज महल से जुड़ा विवाद?

दरअसल, ताज महल से जुड़ा एक विवाद काफी लंबे वक्त से चला आ रहा है, जिसमें दावा करते हुए कहा जाता है कि जहां मकबरा बना हुआ है, वो पहले शिव मंदिर हुआ करता था, जिस पर ताजमहल बनाया गया है। जिसका नाम तेजोमहल होने का दावा किया जाता है। इसी को लेकर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। मालूम हो कि पांचवें मुगल शासक शाहजहां ने सन् 1631 में बेगम मुमताज महल की याद में ताज महल का निर्माण कराया था। इस मकबरे को 1653 में बनाकर तैयार किया गया था। करीब 22 हजार मजदूरों ने 22 साल में महल को बनाया था।

कैसे हुई ताज महल के तेजोमहल होने की चर्चा तेज?

कैसे हुई ताज महल के तेजोमहल होने की चर्चा तेज?

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएन ओक की किताब के बाद से ताज महल के तेजोमहल होने की चर्चा तेज हो गई। यहां तक की कई हिंदू संगठनों ने यहां तक मांग की कि इसका नाम तेजो महालय किया जाना चाहिए। बता दें कि ताज महल का 'तेजो महालय' नाम सबसे पहले एक मराठी बुक से आया था। इसके राइटर पीएन ओक ने 1960 से 70 के दशक में अपनी किताब 'Taj Mahal: The True Story' में ताजमहल का निर्माण एक शिवमंदिर के ऊपर होने की बात की कही थी। अपनी किताब में लेखक ने यह भी दावा किया था कि यह स्मारक 1155 में बना था, जो मुगलों के शासन से कई दशकों पहले की थी।

क्या कभी नहीं खुले ताज के बंद 22 कमरे?

क्या कभी नहीं खुले ताज के बंद 22 कमरे?

आगरा के ताजमहल के अंदर गुप्त 22 कमरों को लेकर दावा किया जाता है कि उसके अंदर ऐसे सबूत दफ्न हैं, जो आगरा के ताजमहल महल को शिव मंदिर साबित कर सकता हैं। ऐसे में लोगों के जहन में एक ही सवाल उठता है कि आखिर उन 22 कमरों में ऐसा क्या है, जिसे आम लोगों की नजर से दूर रखा जा रहा है? लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सीक्रेट रूम ताज महल के बनने के बाद से ही बंद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और नामी संस्थानों के लिए यह तहखाने कई बार खुल चुके हैं। आखिरी बार साल 1934 में यानी 88 साल पहले भारतीय पुरातव विभाग ने इन दरवाजों को खोला था।

 क्या है तहखाने में मौजूद 22 बंद कमरों का राज ?

क्या है तहखाने में मौजूद 22 बंद कमरों का राज ?

आगरा के इतिहासकारों का कहना है कि साल 1934 में 88 साल पहले ताजमहल के सुरक्षा की दृष्टि को लेकर इन बंद कमरों को खोला गया था। बता दें कि इसके पीछे की वजह है जानने की थी कि राष्ट्रीय धरोहर ताज को किसी तरह का नुकसान तो नहीं झेलना पड़ रहा। वहीं एक और मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि एएसआई ने 1993 में तहखाने का संरक्षण कराया था, लेकिन ताज की मजबूती की जांच के लिए नेशनल जियोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और रुड़की यूनिवर्सिटी ने 1993 में सर्वे किया, जिसमें बताया जाता है कि तहखाने की दीवार तीन मीटर मोटी है मुख्य गुंबद पर कब्रों के नीचे का हिस्सा ठोस है।

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