ताज नगरी की सफाई में जुटी 'फेसबुक नौजवान टोली'

आगरा रायजिंग नाम से मार्च से सक्रिये हुए युवाओं इस 'फेसबुक ग्रुप' ने अपने लक्ष्य को अंजाम देने का काम शुरू कर दिया। फेसबुक जहां आपस में संवाद करने का माध्यम रही वहीं नये मित्रों को जोड़ने का भी। पहले केवल युवा जुडे और अब शहर के बुजुर्गों ने भी दिलचस्पी लेना शुरू कर दी है।
पहल करने में रहा संकोच
'ताज सिटी' के नाम से पहचान वाला हमारा विश्व प्रसिद्ध शहर गंदा है,शहरवासी और यहां आने वाले राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक चिता जताते रहते हैं। सफाई के उपकरणों की जरूरत के अनुरूप मौजूदगी है किन्तु मेंटीनेंस नियमित और सही प्रकार से उनकी क्षमता का भी तेजी से क्षरण होता रहा है। "आगरा रायजिंग" के नाम से अब अच्छी खासी पहचान बना लेने वाले इस 'फेसबुक ग्रुप' के लिये भी शुरूआत कम चुनौती भरी नहीं थी।
नगर निगम से सहयोग मिलना अपेक्षित था, लेकिन उसकी ओर से पूरी उदासीनता बरती गयी। राजनेताओं तक ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी। इस सबके बावजूद भी ‘फेस बुकिये' निराश नहीं हुए। अनुभवहीनता के कारण शुरूआत में कुछ दिक्कते आयीं किन्तु अब तेजी के साथ हालात बदल रहे हैं, नागरिक सहयोग को साथ आने लगे हैं। यह अपने आप में एक बड़ी कामयाबी है किन्तु इससे भी बडी उपलब्धि उनकी पहल से उस सोऐ हुए तंत्र की तंद्रा को झकझोर दिये जाने को लेकर है जो कि करोडों का जनधन महानगर की सफाई के नाम पर खर्च करता आ रहा है।
सफाई के प्राथमिक लक्ष्य
हर रविवार को फेसबुकिये सोशल मीडिया के माध्यम से आपस में तय किये गये स्थान पर एकत्र होते है और बिना किसी का इंतजार किये जुट जाते हैं सफाई करने की मशक्कत में। अवकाश का दिन कूड़ा साफ करने को की जाने वाली मशक्कत को लेकर अभियान में लगे युवा जरा भी विचलित नहीं होते। मुख्य मार्गों के दोनों ओर के किनारों और तिराहों व चौराहों के आईलैंडों की सफाई सबसे पहले शुरू की गयी है। कई उन कार्यालयों के आसपास की गंदगी को भी लक्ष्य बनाया गया है जहां पब्लिक की आवाजाही नियमित रहती है।
रोड साइन भी चमकाये
रोड साइनों को ढापने वाले पोस्टरों और पेडों के पत्तो को साफ करना ,सडकों के किनारे लगी मार्ग के नमों की पट्टिकाओं को साफ कर चमकाना भी 'राइजिग इडिया' के वालेंटियर अपना दायित्व मानते हैं।
काम से कहीं जरूरी लोगों को साथ जोड़ना
अभियान को शुरू करने वालों में मुख्य नरेश पारस जो कि आगरा के ‘जन सूचना आंदोलन' के प्रमुख स्थंभ भी माने जाते हैं , ने बताया कि महानगर के नागरिकों को अभियान से जोड़ना उनका मकसद है। वह जानते हैं कि स्वयं सेवी ग्रुप के रूप में उनकी उपलब्धि समस्या की तुलना में कहीं सीमित हैं किन्तु जनजागरुक्ता में उनका विश्वास है।
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एक बार लोग अगर सफाई को सड़क पर आ गये तो और कुछ हो या नहीं कम से कम खुद तो गंदगी फेंकने में योगदान कम कर ही देंगे। इसी से मिलता जुलता मत ‘आगरा राइजिग' के एक अन्य प्रमुख कार्यकर्ता डा. आनंद राय का है, स्वयं कई वर्ष अमेरिकन स्पेस एजेंसी ‘नासा' में वैज्ञानिक रहे डा राय का कहना है कि सफाई हमारी संस्कृति का अभिन्न भाग है। इसे जीवन शैली में एक बार फिर से शामिल करवाने को प्रेरित करना है। शहर के प्रख्यात गंधीवादी शशि शिरोमणी का कहना है कि 'आत्म बल' और सामूहिक प्रयासों के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल है, निश्चित रूप से इसे सफलता मिलेगी।
सोशल मीडिया का ही साहरा
'आगरा राइजिग' की पहल स्थानीय स्थापित मीडिया से गायब है, इसके क्या कारण है, यह तो मीडिया के मालिक या एडीटर ही बता सकते हैं किन्तु 'एक्टिविस्ट' को इससे कोई गुरेज नहीं है। फेसबुक से संवाद क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है और प्रतिदिन नये लोग जुड़ते जा रहे हैं। वैसे फेसबुक के अलावा त्वरित संपर्क के लिये मोबाइल से 'मोबाइल' पर 'एस एम एस' का भी एक्टिविस्ट उपयोग कर रहे हैं।












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