Agra का अनोखा 'इको फ्रेंडली कैफे', चाय पीने के बाद कप खा जाओ, सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

आगरा शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है जहाँ आप चाय पीने के बाद कुल्लड़ या फिर कहें गिलास को फेंकेगे नहीं बल्कि उसे खा जाएंगे।

Agra unique Eco friendly cafe eat cup after drinking tea going viral on social media Up News

भारत में सबसे पसंदीदा पेय पदार्थों की रेस में चाय का कोई सानी नहीं है। चाय की चुस्की के दीवाने हर शहर में मिलेंगे, चाय का हर कोई शौकीन होता है। कोई कुल्लड़ में चाय पीता है तो कोई कागज के गिलास में। अगर चाय मिट्टी के कुल्लड़ में हो तो इसका स्वाद और आनंद दोनों ही अलग हो जाते हैं। कुल्लड़ वाली चाय में मिट्टी की बेहतरीन खुशबू तो आती है, लेकिन चाय पीने के बाद कुल्लड़ और कागज के गिलास फेंकने से आसपास गंदगी भी हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए आगरा शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है जहाँ आप चाय पीने के बाद कुल्लड़ या फिर कहें गिलास को फेंकेगे नहीं बल्कि उसे खा जाएंगे।

‘चाय पियो और कप खा जाओ'

‘चाय पियो और कप खा जाओ'

ऊपर लिखे हैडिंग को पढ़कर अटपटा जरूर लग सकता है लेकिन यह सच है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यूपी के आगरा में कुछ युवाओं ने चाय को लेकर एक अनोखा स्टार्टअप शुरू किया है। चाय का यह स्टार्ट अप अब्बू लाला दरगाह की ओर मुड़ने वाले रोड से 10 कदम आगे है। युवाओं ने अपने चाय के कैफे को इको फ्रेंडली कैफे नाम दिया है। इस कैफे में चाय पीने के लिए आने वाले लोग चाय पीने के बाद आइसक्रीम के कॉन की तरह चाय का कप भी चट कर जाते हैं।
अभी तक आपने लोगों को कांच के गिलास, कप, कुल्हड़ या डिस्पोजेबल गिलास में चाय पीते हुए देखा होगा, लेकिन चाय के कप को बाद में खाते हुआ नहीं देखा होगा। लेकिन इको फ्रेंडली कैफ़े पर आप चाय पीने के बाद चाय के गिलास या फिर कप को ही खा जाएंगे। इस इको फ्रेंडली कैफे का स्टार्टर आशीष ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर शुरू किया है जिसका नाम "इको फ्रेंडली कैफे" रखा है।

तमिलनाडु से मँगाए जाते हैं यह कप

तमिलनाडु से मँगाए जाते हैं यह कप

15 रुपये कीमत वाली स्पेशल चाय में वेफर से बना कप दिया जाता है। कोन वाली आइसक्रीम की तरह चाय पीने के बाद लोग कप को खा भी जाते हैं। चाय का स्टार्टअप शुरू करने वाले आशीष का कहना है कि इसे वेफर्स कप भी कहा जाता है। इससे कचरा नहीं होता। यह उनका बिकुल ही नया कॉन्सेप्ट है और लोगों को खूब पसंद भी आ रहा है।
आशीष ने बताया कि वह एमएससी कर रहे हैं। उन्होंने अपने दोस्त के साथ इस स्टार्टअप शुरू किया है। चाय के लिए जो कप इस्तेमाल किए जा रहे हैं उन्हें तमिलनाडु से मंगाया गया है। यह विभिन्न वैरायटी के हैं जिसमें वेनिला, चॉकलेट जैसे फ्लेवर शामिल हैं। चाय पीने के बाद लोग इसे फेंकते नहीं है बल्कि उसे खा लेते हैं।

चाय ने पलटी है कई लोगों की किस्मत

चाय ने पलटी है कई लोगों की किस्मत

चाय का स्टार्टअप शुरू करने वाले आशीष का कहना है कि लोग परिवार सहित चाय का आनंद लेने के लिए हमारे इको फ्रेंडली कैफे पर आ रहे हैं। चाय पीने वालों का कहना है कि अमूमन लोग चाय पीने के बाद प्लास्टिक या थर्मोकोल का डिस्पोजल कप फेंक देते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कचरा फैलता है। वेफर्स कप से न तो कचरा फैलेगा और न ही पर्यावरण को नुकसान होगा। लोग आएंगे, चाय पियेंगे और कप खा जाएंगे।
इससे पहले भी हो चुके हैं कई चाय वाले फेमस
एमबीए चाय वाले के बारे में तो सबने ही सुना होगा। मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश के धार जिले के प्रफुल्ल बिल्लोर बीकॉम के बाद एमबीए करना चाहते थे। एमबीए नहीं कर पाने से निराश होकर साल 2017 में प्रफुल्ल ने पिता से कुछ रुपए उधार लेकर सड़क किनारे चाय की दुकान खोल ली। प्रफुल्ल की 'एमबीए चायवाला' दु​कान चल गई और महज तीन साल में ही वह करोड़पति बन गया।

लिस्ट यही ख़त्म नहीं होती, पटना में 'रैपर चायवाला' से लेकर 'भोजपुर IItian चायवाला' और पटना की 'ग्रेजुएट चायवाली' से लेकर नागपुर का 'डोली चायवाला' यह सब वह लोग हैं जिनकी किस्मत चाय ने पलट दी। इन्हें चाय ने न केवल छप्परफाड़ कमाई करवाई बल्कि एक अलग पहचान भी दिलाई।

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