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कार की छत पर बंधे शव का क्‍या है सच ? बेटे ने बताई वायरल फोटो की हकीकत

आगरा, अप्रैल 26: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में पूरे देश का बुरा हाल है। उत्‍तर प्रदेश में हालात बेकाबू हो गए हैं। अस्‍पतालों में जगह नहीं है, ऑक्‍सीजन नहीं म‍िल पा रहा है। यहां तक की मौत के बाद अंतिम संस्‍कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें कार की छत पर अर्थी बंधी हुई है। इस फोटो के साथ दावा क‍िया गया कि एंबुलेंस नहीं मिली तो बेटे ने कार की छत पर पिता का शव बांधा और श्‍मशान घाट पहुंचा। लेकिन ये दावा पूरी तरह से सही नहीं है। इस बात की पुष्‍ट‍ि खुद बेटे ने की है। जी हां, वायरल फोटो का सच कुछ और ही है।

कार पर छत पर स‍िर्फ अर्थी थी, शव नहीं

कार पर छत पर स‍िर्फ अर्थी थी, शव नहीं

फोटो शमशान घाट का नहीं, बल्कि आगरा कॉलेज के सामने क्षेत्र बजाजा कमेटी कार्यालय का है। कार की छत पर शव नहीं, सिर्फ तैयार हुई अर्थी थी। दरअसल, लोहामंडी की जयपुर हाउस कालोनी के रहने वाले योगेश जौहरी (67) कोरोना पॉजिट‍िव हो गए थे। अचानक से उनका ऑक्‍सीजन लेवल घट रहा था। बेटे रच‍ित ने घर पर ही ऑक्‍सीजन की व्‍यवस्‍था की। लेकिन घर पर उनका इलाज नहीं हो पा रहा था। डॉक्‍टरों की सलाह पर उन्‍हें 23 अप्रैल की सुबह खंदारी के एक अस्‍पताल में भर्ती कराया।

हार्ट अटैक से हुई थी प‍िता की मौत

हार्ट अटैक से हुई थी प‍िता की मौत

रचित ने बताया कि अस्‍पताल में भर्ती कराने के बाद वह पिता को मोबाइल देकर आए थे। वह पिता को भर्ती कराके घर लौट रहे थे, क्योंकि घर पर अकेली मां मौजूद थीं। उनका भी ख्याल रखना था। रास्‍ते में उनकी कार पंचर हो गई थी। इसी बीच पिता का फोन आया, उन्‍होंने कहा कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है। रचित तुंरत दौड़ते हुए अस्पताल पहुंचे। अस्‍पताल में स्टाफ के लोग पिता के इलाज के लिए भागदौड़ कर रहे हैं, लेकिन उन्‍हें बचा नहीं पाए। उन्‍हें बताया गया कि पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

शव कार की प‍िछली सीट पर रखा हुआ था

शव कार की प‍िछली सीट पर रखा हुआ था

रचित ने बताया कि उन्होंने अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कहा, लेकिन उन्‍होंने असमर्थता जताई। इसके बाद वह अकेले ही पिता के शव को कार की पिछली सीट पर रखकर शमशान घाट के लिए लेकर चल पड़े। पिता के अंतिम संस्कार के लिए अर्थी सजाने से लेकर सारा इंतजाम उन्हें अकेले ही करना था। ऐसे में वह आगरा कालेज के सामने क्षेत्रीय बजाजा कमेटी कार्यालय पहुंचे, वहां से अर्थी समेत अंतिम संस्कार का सारा सामान लिया। अर्थी को उन्होंने कार की छत पर रख लिया, जिसकी तस्‍वीर वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से ले ली। रचित ने बताया कि कार की छत पर सिर्फ अर्थी थी, जबकि शव कार की पिछली सीट पर रखा हुआ था।

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