नूतन की याचिका, साम्‍प्रदायिक दंगों में हो सीबीआई जांच

लखनऊ। सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में बुधवार को याचिका दायर कर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के गठन के बाद हुई साम्प्रदायिक हिंसा की सभी प्रमुख घटनाओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की है। याचिका के अनुसार मौजूदा अखिलेश यादव सरकार और उसके अधिकारियों की नीति इस प्रकार रही है कि इसमें एक धर्म विशेष के प्रति स्पष्ट झुकाव साफ दिख जाता है।

पिछले डेढ़ साल में जितनी भी साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं, उनमें पुलिस द्वारा उस समुदाय के अभियुक्तों के प्रति कार्रवाई करने में शिथिलता बरती गई, जिस कारण दूसरे समुदाय के लोगों में सरकार के प्रति अविश्वास की भावना बलवती होती जा रही है। याचिकाकर्ता ने पहली जून, 2012 को मथुरा में हुई साम्प्रदायिक घटना से लेकर प्रतापगढ़, बरेली, लखनऊ, इलाहाबाद, गाजियाबाद, फैजाबाद, आजमढ़ से मेरठ और अमेठी तक की विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी मामलों में राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई में ढील बरती गई और कार्रवाई पक्षपातपूर्ण रही।

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ठाकुर ने इन सभी साम्प्रदायिक घटनाओं की जांच गुजरात में साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं की तर्ज सीबीआई द्वारा कराए जाने की अदालत से मांग की है। ठाकुर ने याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुजफ्फरनगर की घटना की जांच के लिए गठित किए गए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विष्णु सहाय आयोग में उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश को शामिल कर साम्प्रदायिक हिंसा की सभी प्रमुख घटनाओं की जांच कराए जाने का अनुरोध किया है।

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