मोदी को छोड़कर भाजपा के मंत्रियों को सड़क पर ले आए नीतीश कुमार
पटना। बिहार की सत्तारुढ़ सरकार से बाजपा की दोस्ती का टूटी। दोनों पार्टियां एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में डुट गई है। कभी आरोप-प्रत्यारोप को लेकर दोनों पार्टियां लड़ती है तो कभी एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए। नीतीश सरकार बिहार की बीजेपी ईकाई को अब पत्ता साफ करने में जुट गए है। बीजेपी-जेडीयू का 17 सालों का साथ क्या छूटा नीतीश अब बीजेपी नेताओं को सड़क पर लाने में जुट गए है। बिहार सरकार ने बीजेपी के 8 पूर्व मंत्रियों को बंगले खाली करने का नोटिस थमा दिया है।
दरअसल जब बिहार में एनडीए की सरकार थी तब बीजेपी के इन मंत्रियों तो सरकारी आवास आवंटित किए गए थे, लेकिन जब साथ छूटा तो नीतीश सरकार अब उनसे उनका आशियाना भी छीनने में जुट गई है। नीतीश सरकार ने इन्हें सरकारी आवास खाली करने का फरमान जारी किया है। उनकी दलील है कि पूर्व भाजपा मंत्री अब सरकार में शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें मंत्री आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है।

बीजेपी को बिहार में बेघर करने में जुटी नीतीश सरकार ने कहा है कि अगर पूर्व भाजपा मंत्रियों ने अगले सात दिनों के भीतर बंगले खाली नहीं किए तो उन्हें दो और नोटिस दी जाएंगी। इनमें एक नोटिस आवास से बेदखली का होगा। इसके बाद इन पूर्व मंत्रियों के कब्जे वाले बंगलों को बलपूर्वक खाली कराया जाएगा। इसके लिए सरकार पुलिस बल के उपयोग करने का भी मन बना रही है।
उन्होंने कहा कि यह पूर्व मंत्री सरकार से हटने के बाद पहले ही निर्धारित से ज्यादा समय तक मंत्रियों के आवास में रह चुके हैं। मंत्री पद छोड़ने के बाद वह सिर्फ एक महीने तक ही मंत्री आवास में रह सकते हैं। नीतीश सरकार ने बीजेपी के पूर्व मंत्री अश्वनी चौबे, चंद्रमोहन राय, गिरिराज सिंह, प्रेम कुमार, सत्य नारायण आर्य, सुखदा पंडे, रामाधार सिंह और जनार्दन सिंह सिगरीवाल को नोटिस भेजकर सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है। सरकारी नोटिस के बाद अब अगले 7 महीने के अंदर इन्हें सरकारी बंगला खाली करना होगा। जहां बीजेपी के 8 मंत्रियों को नोटिस थमाई गयी है वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और नंद किशोर यादव को आवास खाली करने को कोई नोटिस नहीं मिला है।












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