स्वतंत्रता दिवस पर मनमोहन के हर वार को मोदी ने किया बेकार
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। स्वतंत्रता दिवस की 67वीं वर्षगांठ पर आज पूरे देश को इस बात का एहसास हो गया कि लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं। चौंक गये ना? मगर ये सच है। मनमोहन सिंह ने दिल्ली के लाल किले से जब देश को संबोधित किया तो उसमें राजनीतिक अलफाज़ नजर आये। एक पल को भी ऐसा नहीं लगा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दे रहे हैं बल्कि ऐसा लगा कि वो देश की जनता से सत्ता पर काबिज रहने का एक मौका मांग रहे हों। हो भी सकता है क्योंकि एक दिन पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड नेता नरेन्द्र मोदी ने उन्हें चुनौती जो दी थी।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी ने मनमोहन सिंह को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि स्वतंत्रता दिवस के दिन देश प्रधानमंत्री के अलावा एक और भाषण सुनेगा जो भुज के लालन कॉलेज से मैं दूंगा। इसके बाद देश मोदी और मनमोहन के भाषण की तुलना करेगा। तुलना होगी वादा बनाम काम पर। तुलना होगी निराशा बनाम आशा पर। हुआ भी ऐसा ही पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली के लाल किला की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इसके कुछ देर बाद ही मोदी ने भुज के लालन कॉलेज से मनमोहन सिंह के भाषण और दावों की धज्जियां उड़ाई। प्रधानमंत्री एक तरफ यूपीए की उपलब्धियां गिना रहे थे तो दूसरी तरफ मोदी गरीबी, महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस पर हमला बोल दिया।

इसके तहत 81 करोड़ भारतीयों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा अनाज मिल पाएगा। यह दुनिया भर में इस तरह का सबसे बड़ा प्रयास है। वहीं नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जिस खाद्य सुरक्षा बिल का दम पीएम भर रहे हैं, इसमें नया क्या है? पहले से कई राज्यों में गरीबों को 3 रुपये प्रति किलो चावल मिल रहा है। सच्चाई तो यह है कि यह बिल गरीबों की थाली से अनाज छीनने का काम करेगी। पहले गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों को महीने में 35 किलो अनाज मिलता था पर अब उन्हें सिर्फ 25 किलो अनाज मिलेगा। उत्तराखंड आपदा पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मुश्किल की इस घडी में पूरा देश उनके साथ है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जल्द से जल्द लोगों के उजड़े हुए घर दोबारा बसाने और बर्बाद हुए बुनियादी ढांचे को फिर से बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम कर रही है। वहीं मोदी ने मनमोहन सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि उत्तराखंड तबाही में अन्य राज्यों द्वारा किए गए सहयोग का जिक्र करने ना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, आप लाल किले से देश को संबोधित कर रहे हैं, पर उत्तराखंड त्रासदी में की गई मदद के लिए देश की जनता को श्रेय नहीं देते हैं। सभी राज्यों ने अपने क्षमता के अनुसार उत्तराखंड की मदद की। पर उनके लिए आप एक शब्द नहीं बोलते हो। साफ शब्दों में कहें तो मनमोहन सिंह के भाषण में कुछ नया नहीं था।
मीडिया एक्सपर्ट की मानें तो मनमोहन सिंह ने वही बातें दोहराई है जिसे आज से 66 साल पहले नेहरू पंडित नेहरू ने की। गबीरी, स्वास्थ्य जैसी समास्याओं पर नेहरू ने बात की थी और मनमोहन ने भी उसे दोहराया। राजनीतिक पहलुओं पर गहरी पैठ रखने वाली और लंबे समय पत्रकारिता जगत से जुड़ी अंकुर शर्मा ने कहा कि लाल किला के प्राचीर से मनमोहन सिंह ने जो भाषण दिया वो निराश करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह से हम बहुत धुआंधार भाषण की उम्मीद भी नहीं कर सकते, जैसा कि मोदी से करते हैं। अंकुर शर्मा ने नरेन्द्र मोदी को 10 में से 10 अंक दिया और वहीं मनमोहन सिंह को 10 में से 4 अंक।












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