भारत पड़ोसी पाकिस्तान को नहीं मान सकता दुश्मन नंबर 1
नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर के पुंछ के पास बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ के बाद भारतीय सेना के गश्तीदल पर हमला कर दिया, जिसमें भारत के पांच जवान शहीद हो गए। हस घटना के बाद संसद में बवाल हुआ, देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए और आज एलओसी पर तनाव कम करने के लिए भारत और पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने हॉटलाइन पर बात की।
हॉटलाइन पर बात करते वक्त पाकिस्तान ने युद्ध विराम समझौते का कड़ाई से पालन करने की बात फिर दोहराई। भारतीय रक्षा अधिकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सैनिकों ने सोमवार देर रात जम्मू एवं कश्मीर के पुंछ सेक्टर में एक भारतीय चौकी पर हमला करके पांच जवानों की हत्या कर दी। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि भारतीय सैनिकों ने बुधवार को एक चौकी पर गोलीबारी करके उनके दो सैनिकों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

आप सोच रहे होंगे कि आखिरकार भारत सरकार पाकिस्तान के साथ सारे रिश्ते तोड़ क्यों नहीं देती? पड़ोसी देश से सारी बातचीत खत्म क्यों नहीं कर देती? आज सभी टीवी चैनल पर आम जनता यही बात बार-बार दोहरा रही है। लेकिन सच पूछिए तो पाकिस्तान से बातचीत के सारे रास्ते बंद नहीं कर सकता। इसे आप समझदारी कहिये या मजबूरी, भारत पाकिस्तान को अपना दुश्मन नंबर 1 नहीं बना सकता है।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है अफगानिस्तान। बहुत जल्द अमेरिका अपनी बची-कुची फौज अफगानिस्तान से हटा लेगा। उसके बाद तालिबानी आतंकवादियों के फिर से उभरने की आशंका भारत को अभी से दिखाई देने लगी है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में बड़े आतंकी हमले होने की आशंका प्रबल हो जायेगी। लिहाजा पाकिस्तान के साथ बातचीत का दौर जारी रखते हुए तालिबानी आतंकवादियों को ऊपर उठने से रोकना होगा। अगर आपको कारगिल युद्ध याद हो, तो यह भी जरूर याद होगा कि भारत ने तब पहले हमला नहीं बोला था, शुरुआत पाकिस्तान ने की थी, जिसका करारा जवाब भारत ने दिया और अंतत: पड़ोसी देश की सेना को पीछे हटना पड़ा।
कारगिल युद्ध में भारत की रणनीति को अमेरिका ने भी सराहा था। सच पूछिए तो भारत वही रणनीति आगे भी अपनायेगा। लेकिन हां बॉर्डर पर आये दिन युद्धविराम का उल्लंघन भी रोकना जरूरी है, तो इसके लिये भारत को कूटनीतिक दबाव बनाना ही होगा।












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