उत्तर प्रदेश में बढ़ता जा रहा है बाढ़ कहर
लखनऊ। उत्तराखंड व नेपाल के बैराजों से पानी छोड़े जाने और रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, यमुना, शारदा, घाघरा सहित अन्य नदियां के जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से तटवर्ती इलाकों में तबाही बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत का काम जारी है।
आपदा नियंत्रण कक्ष के मुताबिक गंगा नदी बुलंदशहर में 0.350 मीटर व बलिया में 0.375, यमुना नदी मुजफ्फरनगर में 0.950, शारदा नदी लखीमपुर खीरी में 0.670, घाघरा नदी बाराबंकी में 0.596 व सरयू अयोध्या में 0.300 और राप्ती नदी बलरामपुर में खतरे के निशान से 0़130 मीटर ऊपर बह रही है। गंगा नदी का जलस्तर फरूखाबाद, रायबरेली, कानपुर, इलाहाबाद, उन्नाव, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, वाराणसी तथा बलिया में बढ़ रहा है। रामगंगा नदी का जलस्तर बरेली में, बेतवा नदी का जलस्तर जालौन, केन नदी का जलस्तर बांदा, गोमती नदी का जलस्तर सीतापुर तथा जौनपुर में बढ़ रहा है।
बाढ़ से प्रदेश के करीब बीस जिलों की 30 से ज्यादा तहसीलों के 600 गांव और 7 लाख आबादी प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा तबाही तराई जिलों-बहराइच, बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, फैजाबाद, बलरामपुर, गोरखपुर, संतकबीर नगर में देखी जा रही है। लखीमपुर खीरी के अपर जिलाधिकारी तुलसीराम ने रविवार को बताया कि जिले के पांच तहसील-गोला, सदर, धौरहरी, पलिया और निघासन शारदा नदी और घाघरा नदी में आई बाढ़ से प्रभावित हैं।
प्रलभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य के लिए सौ से ज्यादा मोटरबोट लगाई गई हैं। 12 राहत शविर लगाए हैं जहां प्रभावित लोगों को भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। बाढ़ संभावित इलाकों में सरकार की तरफ से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी के निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे कि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान बाढ़ से बलरामपुर में दो और सीतापुर में एक व्यक्ति की मौत हुई। जबकि इस मौसम में अब तक कुल 169 मौतें हो चुकी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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