अगर मुझे बंदूक दे दीजिये, तब भी मैं तालिबानियों को गोली नहीं मारूंगी: मलाला
यूएन। लड़कियों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए तालिबानियों के हमले का शिकार हुई पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण देते हुए कहा है कि मैं किसी से घृणा नहीं करती, मैं किसी से बदला लेने के लिए यहां पर नहीं बोल रही हूं और न ही मैं किसी के खिलाफ हूं। बल्कि मैं आतंकवादियों, अतिवादियों और तालिबान सभी की बेटियों के लिए शिक्षा की मांग करती हूं।
गौरतलब है कि लड़कियों की शिक्षा का समर्थन करने के कारण ही मलाला को तालिबानियों ने सिर में गोली मार दी थी जिसके बाद लंदन के अस्पताल में लंबे समय तक उसका इलाज हुआ है। मलाला ने कहा है कि मैं तालिबानियों से घृणा नहीं करती, अगर आप मेरे हाथ में बंदूक दे दें, और जिन्होने मुझे गोली मारी, मेरे सामने भी हों तब भी मैं उन्हें गोली नहीं मारूंगी। क्योंकि मैं चाहती हूं कि दुनिया भर की लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिले।

16 बर्षीय मलाला ने कहा कि मैं महात्मा गांधी, बादशाह खान और मदर टेरेसा से प्रेरित हूं। गांधी जी ने अहिंसा के रास्ते को अपनाया। मैंने भी गांधी जी और मदर टेरेसा से ही अहिंसा के बारे में सीखा है।
मलाला को पूरी दुनिया में महिला शिक्षा का समर्थन करने के लिए जाना जाता है।












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