कांग्रेस से बाहर तो नहीं जाना चाहते बेनी बाबू
[नवीन निगम] कांग्रेस के फैसलों पर इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के गम्भीर आरोपों पर पार्टी में भूकम्प आ गया है। पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने इसे घोर अनुशासनहीनता करार दिया है और बेनी बाबू पर कार्रवाई करने की मांग की है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर बेनी प्रसाद वर्मा जो हर कदम नाप-तौल कर रखते है उन्होंने यह तो समझा ही होगा कि उनका यह बयान उन्हें किस संकट में फंसा सकता है, ऐसा तो नहीं कि बेनी बाबू ने यह बयान जानबूझकर दिया हो और वह इसी के सहारे कांग्रेस छोड़कर बसपा में जाने की सोच रहे हैं क्योंकि थोड़े दिनों पहले यह खबर उड़ी थी कि उनकी बसपा से नजदीकियां काफी बढ़ रही है और पिछले चुनाव के बाद से उन्होंने सपा और मुलायम के खिलाफ खूब जहर इसी लिए उगला था कि उनकी जगह बसपा में आसानी से बन सके।
बसपा भी कुर्मी वोटो पर काफी दिनों से अपनी नजर जमाए बैठी है और बेनी बाबू भी जानते है कि बसपा के दलित वोट का यदि उन्हें सहारा मिल जाए तो वह बाराबंकी में चुनावी नदी बड़ी आसानी से पार कर लेंगे। कांग्रेस के खिलाफ बनते माहौल और प्रदेश की सपा सरकार के उखड़ते पैरों की हकीकत से बेनी प्रसाद वर्मा बड़ी अच्छी तरह से वाकिफ है। वह जानते है कि बसपा को एक कुर्मी नेता की तलाश है और उन्हें बाराबंकी के आसपास वर्चस्व बनाए रखने के लिए बसपा के दलित वोट की और कांग्रेस को छोड़कर अगली सरकार किसी की बनती है और बसपा उसमें सहायक होती है तो कुर्मी नेता होने के कारण उन्हें अगली सरकार में फिर मंत्री पद नसीब हो जाएगा।

क्योंकि उनके आरोपों के बाद कांग्रेस में जिस प्रकार प्रतिक्रिया हुई है उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि इस बार बेनी बाबू राहुल गांधी या किसी अन्य का नाम लेकर बचने वाले नहीं हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने तो केन्द्रीय मंत्री के बयान को लेकर प्रदेश के नवनियुक्त प्रभारी और महासचिव मधुसूदन मिस्त्री से शिकायत की है। इसके अलावा सांसद पीएल पुनिया व जगदंबिका पाल भी उनके बयानों ने नाराज हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. जोशी इन दिनों उत्तराखंड में हैं और उन्हें समाचार माध्यमों से केन्द्रीय मंत्री के वक्तव्य की जानकारी हुई है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में उनकी राष्ट्रीय महासचिव और प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री से बात हुई है और सभी पहलुओं से उन्हें अवगत करा दिया गया है। प्रभारी महासचिव ने आश्वस्त किया है कि वह इस मामले में पार्टी नेतृत्व से बात करेंगे। रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि चूंकि विषय पार्टी के आंतरिक मामले से जुड़ा है इसलिए वह इस बारे में कुछ और नहीं बोलना चाहतीं।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने कहा कि मुस्लिमों को 4.5 प्रतिशत आरक्षण देना पार्टी का नीतिगत मुद्दा है और कांग्रेस सरकारों ने कई राज्यों में यह कार्य किया है। बेनी बाबू न केवल कैबिनेट मंत्री हैं वरन कांग्रेस की नीति नियामक बाडी कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य भी हैं। ऐसे में उनके आरोपों ने तो पूरे नेतृत्व को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है जो बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि वह और कुछ नहीं कह सकते सिवाय इसके कि इस तरह के मामले पार्टी फोरम में उठाए जाने चाहिए। बाराबंकी से लोकसभा सदस्य और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने बेनी के बयान पर प्रतिक्रिया देने से यह कहते हुए इंकार किया कि उन्हें इस मामले में कुछ नहीं कहना है। बेनी के गृह जिले से सांसद पुनिया को बेनी प्रसाद वर्मा का धुर विरोधी माना जाता है और बेनी जब तब पुनिया पर शब्द बाण चलाते रहते हैं।












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