ज्योतिष: बीजेपी-जेडीयू गठबंधन टूटा तो नीतीश को नुकसान ही नुकसान
भारत की राजनीति संक्रमण काल के दौर से गुजर रही है। जैसे-जैसे लोकसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-2 सभी राजनीतिक दल शतरंज की चालों पे चालें चले जा रहें है। कभी ये चालें खुद को दिल्ली के विजयी रथ पर सवार होने के लिए सही लगती है, तो कहीं पर विरोधियों की मजबूत चालों से महत्वाकांक्षाओं पर विराम लगता प्रतीत होता है।
वर्तमान समय के राजनीतिक परिदृश्य में काफी उथल-पुथल की स्थितियां सामने आ रही है। विपक्षी पार्टी भाजपा और जनतादल यूनाइटेड का मजबूत गठबन्धन जो 17 वर्षो से फेविकोल की तरह चिपका हुआ है, उसके टूटने के प्रबल संकेत नजर आ रहें है।
आ रही खबरों के मुताबिक घटक दल जनता दल यूनाइटेड ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बनाये जाने से नाराज है। सूत्रों के अनुसार जदयू का कहना है कि वह राजग में तभी वापसी कर सकती है जब प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी का नाम आगे लाया जाय।
इस स्थिति में नीतीश कुमार के ग्रह नक्षत्रों का अवलोकलन करके यह जानना दिलचस्प होगा कि यदि राजग से जद्यू का गठबन्धन टूटेगा तो नितीश और जद्यू का भविष्य कैसा रहेगा?

नीतीश कुमार
नितीश का जन्म 1 मार्च 1951ई0 को दोपहर 12 बजे हुआ था। उस समय क्षितिज पर मिथुन लग्न उदित हो रही थी। जिसका स्वामी बुध है जो बुद्धिमता एंव गणतीय प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए नीतीश राजनीतिक जोड़-गाठ के दम पर इस मुकाम तक पहुंच है। वर्तमान में नीतीश की जन्मतालिका में मंगल की महादशा में चन्द्रमा के अन्तर में सूर्य का प्रत्यन्तर चल रहा है, जो 28 जून 2013 तक चलेगा।

नीतीश कुमार
मंगल अष्टमेश एंव लाभेश होकर उच्च पद के संकेतक दशम भाव में स्थित है। दशम भाव का मंगल दिग्बली माना जाता है। चन्द्रमा द्वितीयेश होकर षष्ठम भाव में अपनी नीच राशि में बैठा है। जिस कारण नीतीश कुमार बिहार के पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में उभरकर मुख्यमन्त्री के पद तक पहुंचे।

नीतीश कुमार
नरेन्द्र मोदी की नाम राशि वृश्चिक है, जो नितीश की कुण्डली में छठें भाव में स्थित है एंव इसी भाव में नीच का चन्द्रमा बैठा है। छठा भाव विरोधियों का सबसे बड़ा कारक है और नीच का चन्द्रमा हमेशा मन में शंका एंव ईष्र्या के भाव उत्पन्न करता है। इसी कारण नीतीश कुमार को अपने सबसे बड़े विरोधी नरेन्द्र मोदी नजर आ रहें है। भाजपा से जद्यू के अलग होने की जो खबरें आ रही है, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण नीतीश कुमार की पूर्वाग्रह सोंच।

नीतीश कुमार
राहु अपना गोचर पूर्ण करने में 18 वर्ष लगाता है। भाजपा और जद्यू के गठबन्धन को 17 वर्ष हो चुके है। राहु राजनीतिक एंव मध्यस्थता करने वाला ग्रह इसलिए काफी उठा-पटक की स्थिति तो रहेगी किन्तु ऐसी बहुत कम सम्भावना है कि जद्यू भाजपा से अलग होगी। सप्तम भाव अनुबन्ध एंव संगठन का संकेतक भाव है। नीतीश कुमार की कुण्डली में सप्तमेश गुरू भाग्य भाव पर कब्जा जमाये हुये है। अतः जद्यू एंव नीतीश कुमार का भाविष्य गठबन्धन पर ही टिका है।

नीतीश कुमार
यदि गठबन्धन टूटा तो कुछ समय बाद जद्यू में बिखराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। 28 जून तक सूर्य का प्रत्यन्तर चलेगा। तृतीयेश होकर भाग्यभाव में राहु के साथ संग्रस्त है। तृतीय भाव पराक्रम एंव साहस का प्रतिनिधित्व करता है। सप्तमेश गुरू गोचर में अस्त चल रहा है, जो 3 जुलाई को उदय होगा। यानि 3 जुलाई तक भाजपा और जद्यू का गठबन्धन न टूटा तो आगे की स्थिति बेहतर रहेगी।

नीतीश कुमार
जुलाई से राहु की दशा चलने वाली है। राहु राजनीति एंव एनर्जी कारक है। राहु सप्तमेश एंव दशमेश गुरू के साथ सग्रस्त है। सप्तमेश एंव दशमेश भाव क्रमशः गठबन्ध तथा उच्च पद के कारक है। अतः यदि भाजपा से जद्यू का गठबन्धन टूटा तो आने वाले समय में नीतिश के जनाधार में कमी आयेगी एंव उनका राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।












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