ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार- जब स्‍वर्ण मंदिर बना था कब्रिस्‍तान

नई दिल्‍ली। आज 3 जून है। ऐसी तारिख जिसे कोई चाहकर भी अपने दिल से भूला नहीं सकता। सिखों के पवित्र धर्म स्थल को आज के ही दिन कब्रिस्तान में बदल दिया गया था। 3 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू हुआ था। अमृतसर के हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे यानी स्वर्ण मंदिर पर भारत सरकार के आदेश से यह सैनिक अभियान शुरू किया गया। 29 वर्ष पहले 5 जून 1984 की उस रात की टीस अब भी यहां महसूस की जा सकती है। तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर में छिपे चरमपंथियों के खिलाफ सैनिक कार्रवाई का आदेश दे दिया जो ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से चर्चित हुआ।

उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को आदेश दिया और स्वर्ण मंदिर से जरनैल सिंह भिंडरावाला को खत्म करने को कहा। इंदिरा के आदेश के साथ ही देश में पहली बार आस्था के सबसे बड़े मंदिर को आतंकवादियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए हथियारबंद होकर सेना गुरुद्वारे पहुंची। सेना ने मंदिर को आतंकियों से आजाद कराने में सफलता तो हासिल कर लिया लेकिन साथ ही गहरे जख्म भी दे गया। इस कार्रवाई में लगभग 800 चरमपंथी और 200 जवान मारे गए। बाद में इंदिरा गांधी को इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

जिस समय यह ऑपरेशन शुरू किया गया, सेना को जानकारी थी कि स्वर्ण मंदिर के आसपास 17 इमारतों पर 'आतंकवादियों' का कब्जा है। शाम 7 बजे ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया गया। सेना का बस एक मकसद था स्वर्ण मंदिर को जरनैल सिंह भिंडरावाले के चंगुल से आजाद करवाना। सिख चरमपंथी नेता संत जरनैल सिंह भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर में ही शरण ली थी। बातचीत से बात न बनी तो सेना ने स्वर्ण मंदिर को चारों ओर से घेर लिया। दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी शुरु हो गई।

सरकार ने ख्याल था कि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ जाएगी, लेकिन कार्रवाई तीन दिन तक चलती रही। जब 6 जून को सेना की कार्रवाई खत्म हुई तो एक ऐसी स्थिति सामने आई जिसने पूरे देश की राजनीति का नक्शा बदल दिया। ऑपरेशन ब्लू स्टोर के ठीक 4 महीने बाद ही देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। 31 अक्टूबर 1984 को अपने घर से निकल रहीं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके दो सिख सुरक्षा गाडरें सतवंत और बेअंत सिंह ने गोलियों की बौछार कर दी। ऑपरेशन ब्लू स्टार से पैदा हुई सांप्रदायिकता और कट्टरपंथ ने प्रधानमंत्री की जान ले ली। प्रधानमंत्री की हत्या के बाद शुरू हुए दंगों ने करीब तीन हजार लोगों की जान ले ली। इनमें से ज्यादातर सिख थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की कमान संभाल रहे जनरल के एस बरार पर लंदन में हमला किया गया। उन पर जिस वक्त ये हमला वह लंदन में निजी छुट्टी पर थे। इस हमले में वह घायल हो गए। सेना ने भले ही स्वर्ण मंदिर को आंतकियों से आजाद करा दिया हो, लेकिन इस ऑपरेशन की बड़ी कीमत देश को चुकानी पड़ी।

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