Exclusive : मोदी की रणनीति, राहुल ‘ओवररूल्ड’!
अहमदाबाद (कन्हैया कोष्टी)। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मैनेजमेंट, मार्केटिंग और पब्लिसिटी का पर्याय माने जाते हैं और यह बात आज फिर एक बार उन्होंने साबित कर दी। भारी हंगामे, अटकलों और उत्सुकता के बीच नरेंद्र मोदी ने फिक्की में आज के अपने भाषण में जो रणनीति अपनाई, उससे साफ हो गया कि नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के आसमान में सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तारों की तरह नहीं। हालाँकि सूरज की तरह चांद भी एक ही होता है, लेकिन चांद की अपनी कोई रोशनी नहीं होती और यही कारण है कि खुद को सूरज साबित करने के लिए आज नरेंद्र मोदी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ओवररूल्ड कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी के सबसे लोकप्रिय और कद्दावर नेता नरेंद्र मोदी आज फिक्की में महिला उद्यमियों को सम्बोधित करने वाले थे। उनके सम्बोधन पर नजरें गत 4 अप्रेल से ही लग गई थीं। वैसे भारतीय जनता के अलावा भारतीय मीडिया के लिए भी मोदी इस समय टीआरपी बने हुए हैं और मोदी खुद भी मीडिया में बने रहना चाहते हैं। ऐसे में मीडिया और मोदी को आपस में एक-दूसरे की जरूरत है। इसीलिए मोदी की हर गतिविधि पर मीडिया की पैनी नजर होती है, तो मोदी भी मीडिया और जनता की भाषा बोलने में कभी कमी नहीं छोड़ते। यही कारण है कि मीडिया को 8 अप्रेल का बेसब्री से इंतजार था।

खैर मीडिया का इंतजार आज खत्म हो गया, लेकिन मीडिया और राजनीतिक पण्डितों की मंशा पूरी नहीं हो सकी। नरेंद्र मोदी ने जो भाषण दिया, उसे मीडिया द्वारा महत्व दिया जाना तो लाजिमी था, लेकिन यह भाषण उनकी मंशा के अनुरूप नहीं था।
दरअसल नरेंद्र मोदी के पूरे भाषण में कहीं भी उस नाम का जिक्र नहीं हुआ, जिसे लेकर 4 अप्रेल के बाद से हंगामा मचाया जा रहा था। 4 अप्रेल को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सीआईआई में भाषण दिया था और उसी दिन से लोगों का इंतजार था कि मोदी 8 अप्रेल को भाषण दें और उनके भाषण के साथ राहुल के भाषण की तुलना करने का मौका मिले।
लेकिन मोदी का आज का भाषण बहुत ही सटीक के साथ-साथ रणनीतिक भी था। मोदी ने अपने भाषण के इर्द-गिर्द महिलाओं को ही रखा। मोदी जानते थे कि मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनके भाषण से राहुल गांधी का नाम उछाले जाने का इंतजार है, बेसब्री है, लेकिन मोदी ने अपने भाषण में न तो राहुल गांधी की तरह कोई विजन रखने की कोशिश की और न ही उनके उस दिन के भाषण के किसी अंश पर ही कोई टिप्पणी की।
वैसे मोदी गत 6 अप्रेल को भाजपा के स्थापना दिवस समारोह के दौरान राहुल गांधी के भाषण पर ‘मधुमक्खी बहस' छेड़ चुके थे और लोगों को उम्मीद थी कि आज भी मोदी जरूर कोई नुक्ता-चीनी करेंगे। फिक्की में जैसे ही मोदी ने बोलना शुरू किया, सबकी निगाहें उन पर टिक गईं, परंतु मोदी ने शुरू से लेकर आखिर तक अपना भाषण महिलाओं पर केन्द्रित रखा। यहाँ तक कि सवाल भी महिलाओं के ही सुने।
दूसरी तरफ मोदी मुख से राहुल शब्द सुनने को बेकरार राजनीतिक पण्डित निराश हो गए, लेकिन इसके पीछे मोदी की रणनीति शायद किसी की समझ में नहीं आई। रणनीति साफ-साफ यही थी कि मोदी राहुल गांधी को कट टु साइज करना चाहते थे और इसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे हैं। चार अप्रेल से पहले तक भाजपा और मीडिया में नरेंद्र मोदी का नाम चर्चा में आता, तो राहुल गांधी के साथ उनकी तुलना केवल लोकप्रियता के मामले में की जाती थी, लेकिन 4 अप्रेल को राहुल के सीआईआई वाले प्रवचन को मीडिया में न केवल प्रमुखता से दिखाया गया, बल्कि 8 अप्रेल के मोदी के फिक्की के भाषण को उससे जोड़ने की कोशिश की गई।
मोदी जानते थे कि यदि वे अपने भाषण में राहुल या उनके सीआईआई वाले भाषण का कोई भी उल्लेख करते हैं, तो राहुल गांधी को अनायास ही कद बढ़ाने का अवसर मिल जाएगा। मीडिया और राजनीतिक पण्डित उनके भाषण को राहुल के साथ तुलनात्मक अंदाज में दिखाएँगे। शायद इसी कारण मोदी ने एक सोची-समझी रणनीति अपनाते हुए अपने पूरे भाषण में राहुल गांधी को ओवररूल्ड कर दिया। यदि मोदी राहुल गांधी का उल्लेख करते, तो निश्चित तौर पर राहुल को न चाहते हुए तवज्जो मिल जाती। इसीलिए मोदी ने राहुल गांधी को कट टु साइज करते हुए पूरी तरह अपने भाषण से ओवररूल्ड कर दिया।
भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी को यूँ ही चाणक्य नहीं कहा जाता। गुजरात में ग्यारह वर्षों से शासन कर रहे नरेंद्र मोदी अनेक विरोधाभासों के बावजूद लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीत पाए हैं, तो वे अपनी विशिष्ट चाणक्य नीति, विशेष प्रयासों, रणनीतिक सोच, विकास और उसके जबर्दश्त प्रचार के कारण ही। मोदी ने अपने बूते अपने कदम को बढ़ाया है और आज वे भारतीय राजनीति में सूरज की तरह चमक रहे हैं।












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