दिल्ली की सेक्सवर्कर्स के लिए बेरंग रही होली

फिर भी, त्योहार पर यौनकर्म से जुड़ी महिलाएं आपस में मिठाइयों का आदान-प्रदान करेंगी तथा पूजा-पाठ करेंगी। शीला (परिवर्तित नाम) ने बताया कि, जब मैं बड़ी हो रही थी तब होली मेरा प्रिय त्योहार था। अब होली पर मैं अपने कमरे की खिड़की से लोगों को होली खेलते हुए देखती हूं, और सोच में पड़ जाती हूं कि क्या मैं कभी होली खेल सकूंगी। शीला की 19 वर्षीया सहेली सोनू ने कहा, हम पूजा-अर्चना करते हैं तथा एक दूसरे को मिठाइयां देते हैं। हमारे लिए होली हमेशा रंगहीन रहती है।
इस इलाके में शराब के नशे में धुत युवकों द्वारा महिलाओं के साथ होली खेलने के बहाने उनका उत्पीड़न करना त्योहार मनाने में सबसे बड़ी बाधा है। एक चकलाघर चलाने वाली 45 वर्षीय महिला शर्मिला ने बताया, होली के दिन हम शाम को चार बजे के बाद ही चकलाघर खोलते हैं क्योंकि नशे में धुत्त कई व्यक्ति सिर्फ हमें भद्दे तानों एवं इशारों से परेशान करने आते हैं। रंग पुते चेहरों वाले पुरुषों को देखकर बहुत सी लड़किया डर भी जाती हैं।
लेकिन ये यौनकर्मी होली की पूर्वसंध्या पर चकलाघरों से बाहर निकलकर होलिका दहन देखने जरूर जाती हैं। यौनकर्मियों में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने अंधकारमय जीवन से व्यथित हो चुकी हैं और अब उन्हें त्योहारों में कोई रुचि नहीं है। आंध्र प्रदेश निवासी 25 वर्षीय यौनकर्मी शिबी (परिवर्तित नाम) ने कहा, मुझे रंगों से कोई लगाव नहीं है और मैं कोई भी त्योहार नहीं मनाना चाहती, क्योंकि मेरे पास खुशियां मनाने की कोई वजह नहीं है।
मेरे जीवन में कुछ नहीं बचा और इसके अब कोई मायने नहीं रह गए हैं। गनीमत है कि होली के अवसर पर पुलिस महकमा इस इलाके में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा देती है। दिल्ली (मध्य) के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेश श्रीवास्तव ने बताया, होली पर हम इस इलाके में पुलिस की तैनाती बढ़ा देते हैं तथा भ्रमणशील पुलिस के दस्ते भी बढ़ा दिए जाते हैं। (आईएएनएस की रिपोर्ट के साथ)












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