आतंकवाद से कैसे लड़े यूपी, जब अधूरी है ATS की टीम

पर अपनी सरकार के पांच साल गुजर जाने के बाद भी मायावती इस दल में पूरे पदों पर अफसरों की नियुक्ति नहीं कर पाईं। हद तो यह है कि एक साल पहले आई समाजवादी पार्टी की सरकार ने भी एटीएस के खालों पदों पर भर्ती करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। यही वजह है कि अफसरों की कमी के चलते आतंकी
गतिविधियों और सूचनाओं के संकलन में दिक्कतें आ रही हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रहा है। वर्ष 2006 से वर्ष 2010 तक आतंकियों ने सूबे में कई बडी घटनाओं को अंजाम दिया। हालांकि एक दर्जन से ज्यादा आतंकी पकडे भी गए। फिर भी राज्य सरकार ने इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए गठित एटीएस के ढांचे को मजबूत करने की योजना नहीं बनाई। यही वजह है कि एटीएस में 247 पदों के सापेक्ष 67 से ज्यादा पदों पर काफी समय से कोई तैनाती नहीं की गई।
इनमें डिप्टी एसपी से लेकर विस्फोटक विशेषज्ञ तक के पद खाली पडे हैं। आंकडों के अनुसार एटीएस में नौ डिप्टी एसपी के पद स्वीकृत हैं। लेकिन चार खाली हैं। जबकि निरीक्षक के 12 पदों में से 5, उप निरीक्षकों के 36 पदों के सापेक्ष 13 खाली हैं। आरक्षी नागरिक पुलिस के 90 पदों में से 16, आरक्षी सहायक पुलिस के 12 में से 3, आरक्षी चालक 1, निरीक्षक-एम एक, उप निरीक्षक के दो, एएसआई एम का एक, बंगाली अनुवादक का एक पद खाली है। इसके अलावा फील्ड यूनिट के लिए बनाई गई टीम पूरी तरह खाली है।
एटीएस की इस टीम में जूनियर साइंटिफिटक ऑफिसर के सृजित दोनों पदो ंके साथ-साथ विस्फोटक विशेषज्ञ आरक्षी के चारो पद खाली हैं। इसके अलावा अर्दली के भी 22 में सात पद रिक्त हैं। इन पदों के रिक्त होने से एक ओर जहां आतंकवाद से निपटने के अभियान को पलीता लग रहा है वहीं राज्य सरकार की मंशा भी उजागर हो रही है।












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