Exclusive: हैदराबाद धमाकों पर चुप क्यों हैं राहुल गांधी?

बैंगलोर। एक बार फिर से आतंकवाद का तमाचा भारत के गाल पर पड़ा है। आंसुओं का सैलाब रोके नहीं रूक रहा है। जिनके घरों के लोग इस खौफनाक हादसे के शिकार हुए हैं उनके दुख की कल्पना भी आम इंसान नहीं कर सकता है।

इस मु्द्दे पर राजनीति भी शुरू हो गयी है। केन्द्र सरकार को कोसा जा रहा है, पुलिस की नाकामी पर सवाल उठाये जा रहे हैं लेकिन इस बीच ना तो उनकी आवाज सुनायी दी है और ना ही उन्होंने अपनी प्यारी जनता के पास आकर संवेदनाओं के दो शब्द भी बोले हैं।

आप समझ गये होंगे कि यहां बात किसकी हो रही है? जी हां यहां बात की जा रही है कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष राहुल गांधी की। जिनके दम पर कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है।

कांग्रेस के कुछ नेताओं को लगता है कि राहुल गांधी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे इसके पीछे उनका तर्क है कि वो सत्ता प्रेमी नहीं हैं। वो आम जनता को समझते हैं, उनके साथ चलना चाहते है। उन्हें वो भारत सुधारना है जो ट्रेनों औऱ बसों में चलता, झोपड़ियों में जीवन यापन करता है।

तो जिनके बारे में वो सोचते हैं तो वो ही राहुल गांधी आज उनलोगों के लिए क्यों चुप हैं? जो गुरूवार को इस हादसे का शिकार हुए।

अपनी हर चुनावी रैली में उन्होंने चिल्ला-चिल्ला कर यह जताया कि वो आतंकवाद का दर्द भली-भांती समझते हैं? उन्होंने अपने बचपन में दादी इंदिरा को खोया तो जवानी में अपने पिता राजीव गांधी को। उस उम्र में जब बेटे को बाप के सहारे औऱ मार्गदर्शन की जरूरत होती है उसी समय उनके सिर से बाप का साया उठ गया था। इसलिए वो देश से आतंकवाद को जड़ से मिटाना चाहते हैं।

तो उनकी चाहत हैदराबाद के लोगों के लिए क्यों नहीं उजागर हुई? आखिर क्या हैदराबाद धमाकों में किसी का बाप नहीं मरा है। किसी के सर से पिता का साया नहीं उठ गया । क्या दो शब्द कह देने से राहुल, राहुल गांधी नहीं रहते हैं। अपने आप को देशवासियों का हितैषी बताने वाले राहुल का यह रवैया क्या पीएम बनने के लायक है?

कांग्रेस हमेशा कहती है कि राहुल गांधी फालतू मुद्दों पर नहीं बोलते हैं तो क्या हैदराबाद धमाका एक फालतू मुद्दा है? क्या वो तभी लोगों का दर्द समझते हैं जब वो किसी दलित के घर रोटी खाते हैं? आखिर वो क्या वजह है जिनके कारण राहुल गांधी हैदराबाद ब्लास्ट पर चु्प्पी साधे हुए हैं? क्या इस बेरूखी और असंवेदानिक रवैया उन्हें पीएम की कुर्सी दिलवा सकता हैं? या फिर वो सही में पीएम पद के लायक है?

आप लोगों का इस मामले पर क्या जवाब है? अपना जवाब कमेट बॉक्स में जरूर लिखें।

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