नर्सरी एडमीशन- दखल नहीं देगा हाईकोर्ट, जारी रहेगी मनमानी

ज्ञात हो कि गैर सहायता प्राप्त एवं निजी स्कूलों में नर्सरी की कक्षा में प्रवेश को लेकर दिल्ली सरकार ने एक नोटिस जारी कर दिया कि स्कूल खुद मानक तय कर सकते हैं। उस अधिसूचना के खिलाफ आरटीई एक्टिविस्ट एवं एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन उसे मंगलवार को खारिज कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील राजीव मेहरा ने दलील दी कि आरटीई के अंतर्गत बच्चों का एडमीशन कक्षा एक से आठ तक होता है, लिहाजा नर्सरी। यानी कक्षा 1 से 8 तक में ही गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य है। और केंद्र सरकार की ओर से बनाये गये कानून में साफ लिखा है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले के लिये राज्य सरकार अलग से नीति बना सकती है। लिहाजा दिल्ली सरकार ने प्री-प्राइमरी में एडमीशन के लिये अधिसूचना जारी की, जिसमें सकूलों को अपने खुद के मानदंड तय करने की छूट दी।
कुल मिलाकर देखा जाये तो हाईकोर्ट के फैसले से निजी स्कूलों के प्रबंधकों की बांछे खिल गई हैं। अब वो मनमाने ढंग से फीस वसूल सकते हैं और अब उन्हें उन गरीब बच्चों को एडमीशन नहीं देना पड़ेगा, जिनकी वजह से उनका स्टेटस डाउन होता है।












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