अतिपिछड़ों को आरक्षण से दूर कर रही है सपाः भाजपा

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लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने निषाद, मल्लाह, केवट, बिन्द, मांझी, धीवर, घीमर, कश्यप, कहार, गोडि़या, तुरहा, बाथम, चाई, तीयर, रायकवार, कुम्हार, प्रजापति, भर, राजभर आदि अतिपिछड़ी को अनुसूचित जातियों में शामिल करने की सपाई घोषणा को राजनीतिक नाटक बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि किसी जाति को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अधिकार राज्य सरकार को नही है। उन्होने कहा कि किसी जाति वर्ग, उपवर्ग व उपजाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का अधिकार संसद को है।

सपा की योजना अतिपिछड़ी जातियों के वोट बैंक पर डाका डालने की है। वह इसीलिए अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर की घोषणा कर रही है। वह अतिपिछड़ी जातियों को सामाजिक अन्याय का शिकार बनाने का षडयंत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा की राज्य सरकार ने 10 अक्टूबर 2005 मे भी इसी तरह अधिसूचना जारी की थी। कोई लाभ नही हुआ। इस बार भी इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के विधि विरूद्ध कार्य से ये जातियां त्रिशंकु बन जायेंगी। तब इन्हें अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नही मिलेगा और न ही अन्य पिछड़े वर्ग का।

सपा की मंशा सामाजिक न्याय व आरक्षण का लाभ देने की कतई नही है। सपा इन जातियों का वोट पाने के लिए ही ऐसी घोषणाएं कर रही है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सदैव से वंचितों व अतिपिछड़ों को सामाजिक न्याय व संरक्षण देकर समतामूलक समाज का निर्माण करने का प्रयास करती रही है। उप्र सरकार की सामाजिक न्याय समिति 2001 की सिफारिश के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने अन्य पिछड़े वर्ग की 3 सूची बनाई थी।

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