फांसी से थोड़ी देर पहले अफजल ने लिखा था पत्नी को खत

अफजल को फांसी देने की तैयारी 4 फरवरी को गृह मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के साथ ही शुरू हो गई थी। अपना नाम जाहिर नहीं होने देने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, "जब उसे फांसी की जानकारी दी गई तब वह शांत और प्रतिक्रिया विहीन था। उसने इच्छा जाहिर की कि वह अपनी बीवी को खत लिखना चाहता है। जेल अधीक्षक ने उसे कलम और कागज दिया।" अधिकारी ने बताया, "उसने उर्दू में खत लिखा जिसे कश्मीर में रह रहे परिवार के पते पर उसी दिन भेज दिया गया।" जब घाटी के सोपोर में रह रहे उसके परिवार से खत के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें यह खत नहीं मिला है।
अफजल गुरु के चचेरे भाई यासीन गुरु ने बताया, "हमें अभी तक खत नहीं मिला है। आज जो खत हमें मिला है वह शायद उसकी फांसी दिए जाने की जानकारी से संबंधित है।" अफजल गुरु को तिहाड़ जेल संख्या- 3 स्थित उसके एकांत वाले सेल के ही समीप फांसी देने के लिए जल्लाद को बुलाया गया था। एक अधिकारी ने बताया, "इस फैसले की जानकारी कुछ गिने चुने अधिकारियों को ही दी गई थी। तीन चिकित्सकों और एक मौलवी, जिन्होंने उसका कफन-दफन किया को एक रात पहले गुप्त रूप से सूचित कर दिया गया था। उन्हें शनिवार सवेरे ही आने के लिए कह दिया गया था।"
कार्रवाई को गोपनीय रखने का मकसद इसकी जानकारी लोगों को नहीं होने देना था। अफजल ने सुबह की अपनी नमाज अदा की और पवित्र कुरान के कुछ पन्नों का पाठ किया। फांसी वाली सुबह वह शांत था और उसने अधिकारियों का अभिवादन किया। इनमें से कई लोगों को उसने उनके पहले नाम से संबोधित किया। उसे उसके सेल के पास ही दफना दिया गया। परिवार ने मांग की है कि उन्हें अफजल गुरु का अंतिम संस्कार करने की इजाजत मिलनी चाहिए। अधिकारियों ने कहा है कि "सरकार इस बारे में फैसला लेगी।" अफजल गुरु को 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले की साजिश रचाने का दोषी ठहराया गया था। (आईएएनएस)












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