बीपी, शुगर और डिप्रेशन के शिकार एमपी के पुलिसवाले
जबलपुर। मध्य प्रदेश में काम के बढ़ते बोझ और तनाव के चलते खाकीवर्दी वालों पर बीमारियां हावी होने लगी है, आलम यह है कि हर दूसरा वर्दीधारी रक्तचाप, शर्करा (शुगर) और हताशा (डिप्रेशन) जैसी बीमारियों से जूझ रहा है। यह खुलासा हाल ही में जबलपुर में आयोजित पुलिस वालों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर से हुआ है।
आम आदमी की सुरक्षा से लेकर समाज में अमनचैन कायम रखने की जिम्मेदारी होती हैं, इसके चलते पुलिस जवानों को 24 घंटे सजग व सतर्क रहना पड़ता है। काम के कारण पुलिस जवानों को तनाव के दौर से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं काम के बढ़ते बोझ के कारण उन्हें शारीरिक तौर पर स्वस्थ्य रहने के लिए व्यायाम आदि करने तक का भी वक्त नहीं मिल पाता है।

पुलिस जवानों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के बीमारी की जद में होने का खुलासा हुआ है, जो आंकड़े सामने आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। शिविर में आए चिकित्सक ने बताया कि अधिकांश पुलिसकर्मी रक्तचाप, शुगर व डिप्रेशन जैसी बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। शिविर में आए 50 फीसदी से ज्यादा पुलिस जवान किसी न किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रसित पाए गए हैं।
क्या कहते हैं आईजी साहब
पुलिस महानिरीक्षक वी. मधुकुमार मानते हैं कि पुलिसकर्मियों पर सजग व सतर्क रहने की जिम्मेदारी होती है। किसी भी अपराध घटित होने पर पुलिस पर दोषारोपण किया जाता है। इसके चलते पुलिसकर्मी तनाव में रहते हैं और बीमारी उन पर असर दिखा जाती है।
पुलिस अधीक्षक हरि नारायण चारी ने आईएएनएस को बताया कि पुलिस जवानों की सेहत पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं, साथ ही उन्हें परामर्श भी दिया जा रहा है। आगे कहते हैं कि सेहत व मस्तिष्क को दुरुस्त रखने के लिए व्यायाम जरूरी है। यही कारण है कि पुलिस थाने स्तर पर बालीवॉल आदि जैसे खेलों के इंतजाम किए जा रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि पुलिस जवानों को सेहतमंद रखने के लिए व्यायाम और योग कराना आवश्यक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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