देश की भावनाओं से खिलवाड़ कर उपाध्यक्ष बने राहुल गांधी

यानी यह साफ हो गया कि देश की सबसे बड़ी चिंताओं पर चर्चा महज एक स्वांग था, जो राहुल बाबा के लिये कांग्रेस ने रचा था। जरा सोचिये कौन नहीं जानता था कि सोनिया गांधी के बाद पार्टी में अगर किसी की सुनी जाती है, तो वो राहुल गांधी हैं। यहां तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कद भी पार्टी में उनसे नीचे ही दिखाई देता है। फिर पार्टी के इतने मजबूत नेता की ताजपोशी के लिये इतना बड़े आयोजन की क्या जरूरत थी। सच पूछिए तो यह चिंतन शिवर सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी के लिये आयोजित किया गया था, ताकि देश भर के कांग्रेस नेताओं के सामने उनकी ताजपोशी की जा सके।
खैर कांग्रेस ने जो किया सो किया, लेकिन एक आम आदमी होने के नाते मुझे काफी ठेस पहुंची है। हर रोज फल खरीदने से पहले दो बार सोचने वो हर उस इंसान को ठेस पहुंची है, जो महंगाई के बोझ तले दबा हुआ है। हर उस ग्रहणी के दिल को ठेस पहुंची है, जो अपने बच्चों को दोनों टाइम दूध नहीं दे पाती, हर उस युवक के दिल को पहुंची है, जिसे हर जगह बेरोजगार होने के ताने मिलते हैं, हर उस लड़की के दिल को पहुंची है, जिसका सामना हर रोज बस में सफर करते वक्त मनचलों से होता है। हर उस मजदूर को पहुंची है, जो दिन भर खून-पसीना एक करने के बाद महीने के मात्र 3 हजार रुपए जुटा पाता है। हर उस बाप को पहुंची है, जिसकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ। हर उस बाप को पहुंची है, जिनकी बेटियां दूर पढ़ रही हैं। क्योंकि इस चिंतन शिविर के शुरू होने के पहले इन सभी के मन में एक आस जगी थी।
सच पूछिए तो इन लोगों के साथ कांग्रेस पार्टी ने खुलेआम छल किया है। इन लोगों के घावों पर मरहम लगाने के बजाये भाषणों के जरिये कुरेदा गया, सिर्फ इसलिये ताकि राहुल की ताजपोशी के लिये आयोजित यह शिविर चर्चा में आ सके, ताकि लोग जानें कि जयपुर में कुछ चल रहा है। अगर सिर्फ कांग्रेस के अपने मुद्दों पर चर्चा करते, तो क्या होता, लोग झांकते तक नहीं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने इसी शिविर से लोकसभा चुनाव का बिगुल भी फूंक दिया है, तो यह कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल है। क्योंकि जिन लोगों को आज चोट पहुंची है, वो लोग आपको कभी वोट नहीं देंगे।
बेहतर होता अगर कांग्रेस पार्टी एक निष्कर्ष के साथ समारोह का समापन करती। चिंतन हुआ, मंथन हुआ, लेकिन निष्कर्ष में निकले सिर्फ राहुल बाबा, न देश की समस्याओं का कोई हल और न कोई पहल।












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