Exclusive: मोदी की आंधी या सत्ता विरोधी लहर?

अहमदाबाद। गुजरात में आज आंधी चली है। जी नहीं। गुजरात में बरसात का मौसम नहीं है और न ही किसी पश्चिमी विक्षोभ या समुद्री दबाव के चलते मौसम का मिजाज बदला है। गुजरात में आज आंधी चली है मतदान की। यह आंधी ही तो है। जिस गुजरात में आम तौर पर मतदान का प्रतिशत 60 से कम रहता है, उसी गुजरात में आज मतदाताओं ने दिल खोल कर मत का दान किया है। अब इसे आंधी तो कहा ही जाएगा, लेकिन इस आंधी के पीछे सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्या कहती है ये आंधी?

गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में गुरुवार को पहले चरण में 87 सीटों के लिए लगभग ... प्रतिशत मतदान हुआ है। इसके साथ ही 846 उम्मीदवारों का भाग्य इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में बंद हो गया है, परंतु यहाँ हम बात उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि उनके आकाओं की करने जा रहे हैं। आखिर मतदान की यह आंधी क्या संकेत कर रही है। मतदान के इस आंकड़े को देख कर चुनाव विश्लेषक अपना-अपना आकलन करने में जुट गए हैं। जहाँ तक राजनीतिक दलों का सवाल है, तो भाजपा-कांग्रेस के अलावा जीपीपी भी भारी मतदान को अपने पक्ष में बता रही है, परंतु इन सबके बीच एक और तसवीर साफ उभर रही है।

Narendra Modi

गुजरात में पिछले दो दशक से यह प्रचलन और मान्यता व्याप्त है कि अधिक मतदान का फायदा सीधे-सीधे भाजपा को होता रहा है। जहाँ तक विधानसभा चुनावों पर गौर करें, तो 1995 में 64.39 प्रतिशत, 1998 में 59.30 प्रतिशत, 2002 में 61.54 प्रतिशत व 2007 में 59.77 प्रतिशत मतदान हुआ था और चारों ही चुनाव में भाजपा को दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ था।

बात इस बार की करें, मतदाताओं ने इस बार लगभग सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह सही है कि आज केवल 87 सीटों के लिए ही मतदान हुआ है और 95 सीटों के लिए मतदान अभी बाकी है, परंतु आज कम से कम आधे गुजरात वो भी महत्वपूर्ण अंचलों सौराष्ट्र तथा दक्षिण गुजरात का जनादेश तो ईवीएम में बंद हो ही चुका है।

लेकिन सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर मतदान की यह आंधी किसे अपने साथ ले उड़ेगी और किसे धूल-धूसरित करेगी? पुराने अनुभवों और आंकड़ों की मानें, तो निश्चित रूप से यहाँ फायदा भाजपा को होता दिखता है, परंतु उपरोक्त चारों चुनावों में से तीन में सीधा-सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच था, तो 1998 में शंकरसिंह वाघेला की राजपा मैदान में थी। हालाँकि राजपा की दुर्गति से स्पष्ट हो गया था कि वह मुकाबला भी भाजपा-कांग्रेस के बीच ही बन कर रह गया था।

अब इस बार की बात करें। इस बार चुनावी जंग में भाजपा-कांग्रेस के अलावा केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) है, परंतु मतदान के आंकड़ों से स्पष्ट है कि मतदाताओं ने भारी मतदान करके यह जता दिया है कि उनका रुझान किसी एक की ओर ही है। यदि जनादेश में बिखराव होता, तो मतदान इतना अधिक न हुआ होता।

आज के मतदान से कई सवाल खड़े होते हैं। पहला यह कि परम्परागत के मुताबिक यह मान लिया जाए कि अधिक मतदान भाजपा के पक्ष में है? दूसरा सवाल यह कि अधिक मतदान को 11 वर्षों से सत्तारूढ़ भाजपा या मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उठी आवाज समझा जाए? तीसरा प्रश्न यह है कि अधिक मतदान करके लोगों ने मोदी के विकल्प के रूप में केशुभाई या कांग्रेस में से किसी एक की ओर झुकाव दर्शाया है? या फिर लोगों ने अधिक मतदान करके सीधे-सीधे तौर पर मोदी के पक्ष में लहर व्यक्त की है?

क्रमवार समझते हैं और समीक्षा करते हैं। यदि यह मान लिया जाए कि गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में मोदी ही मुद्दा थे, तो फिर यह तय है कि मतदान की अधिकता या तो मोदी के पक्ष में है या फिर मोदी के खिलाफ। मोदी ही मुद्दा होने से तात्पर्य है 11 वर्षों से शासन कर रहे मोदी को दोबारा मौका दिया जाए या नहीं? यदि इन्हीं दो विकल्पों को लेकर मतदाता मतदान केन्द्र पहुँचे हों, तो फिर सीधी बात है कि लोगों ने या तो भाजपा के पक्ष में मत देकर मोदी को एक और मौका देना चाहा है या फिर मोदी के विकल्प के रूप में कांग्रेस या जीपीपी को वोट दिया होगा। यदि ऐसा है, तो फिर मोदी समर्थक मतों के बँटवारे का प्रश्न ही नहीं उठता।

मतों का बँटवारा हुआ हो, तो फिर मोदी विरोधी मतों का हुआ हो सकता है। इस स्थिति में भी फायदा मोदी को ही होने की संभावना है, तो दूसरी ओर यदि यह मान लिया जाए कि अधिक मतदान सत्ता विरोधी लहर दर्शाता है, तो ऐसा मानने के लिए कोई बड़ा कारण दिखाई नहीं देता। संभव है कि स्थानीय मुद्दे कुछ-कुछ जगह हावी हों, परंतु गुजरात में पिछले 11 वर्षों के शासन के दौरान मोदी के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन का न होना, न ही किसी प्रकार का सामूहिक विरोध दिखना, इससे साबित होता है कि मोदी विरोधी लहर पर यह मतदान सवार नहीं रहा होगा।

उपरोक्त संभावनाओं से स्पष्ट है कि मतदान की यह आंधी काफी हद तक मोदी के पक्ष में दिखती है, परंतु अंतिम निर्णय तो 20 दिसम्बर को ही पता चल सकेगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+